पश्चिमी देशों के दबाव को किया खारिज, PM Modi की नीतियों को सराहा
भारत-रूस की अटूट दोस्ती पर व्लादिमीर पुतिन का बड़ा बयान
मास्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच सदियों पुराने और मधुर संबंधों को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सुगम तरीके से चल रही रणनीतिक व व्यापारिक साझेदारियों की पुष्टि करते हुए उन सभी अफवाहों और अटकलों का मुंहतोड़ जवाब दिया है, जो मिडिल ईस्ट संघर्ष के बाद से पश्चिमी देशों द्वारा फैलाई जा रही थीं। पुतिन ने गुरुवार को नई दिल्ली के साथ मॉस्को की रणनीतिक साझेदारी की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि भारत-रूस की दोस्ती में विलेन बनने का प्रयास करने वाले लोग वास्तव में वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को रूस के साथ अपने सहयोग को कम करने के लिए मजबूर करने के पश्चिमी देशों के तमाम प्रयास पूरी तरह विफल हो चुके हैं और दोनों देशों का यह आपसी याराना पूरी तरह अटूट है। रूसी राष्ट्रपति ने वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और उसकी पूरी तरह से स्वतंत्र विदेश नीति की जमकर तारीफ की। पुतिन ने कहा कि भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वर्तमान में इसकी आर्थिक विकास दर बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने केवल संबंधों की दुहाई ही नहीं दी, बल्कि यह मजबूत भरोसा भी जताया कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाला द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंचने की पूरी संभावना रखता है। पुतिन ने साफ किया कि भारत पर रूस के साथ संबंधों को सीमित करने के लिए पश्चिमी देशों के लाख दबावों, प्रतिबंधों और टैरिफों के बावजूद कोई भी नकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिला है।
उल्टा ऐसा लग रहा है कि पश्चिमी देशों का यह अनावश्यक दबाव और कोशिशें अब उन्हीं पर भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच से यह संदेश दिया कि अब सभी को यह बात अच्छी तरह समझ आ गई है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत पर किसी भी तरह का दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए बेहद हानिकारक है। यह दबाव कहां से आ रहा है, इससे भारत को कोई फर्क नहीं पड़ता। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने जो सबसे अधिक आर्थिक विकास दर दर्ज की है, यह कोई अचानक हुई उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों का ठोस परिणाम है। नई दिल्ली हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती आई है। अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती राजनयिक भागीदारी, रूस के साथ उसके सदियों पुराने और परखे हुए संबंधों में कभी कोई बाधा नहीं डालती और न ही उन्हें कमजोर करती है। जब पुतिन से पूछा गया कि क्या अमेरिका के साथ भारत का गहरा जुड़ाव रूस के लिए किसी प्रकार की असहज स्थिति पैदा करता है, तो उन्होंने बहुत ही परिपक्वता से जवाब देते हुए कहा कि रूस को इस बात की बेहद खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण मानता है। रूस भारत को हमेशा से एक विश्वसनीय साझेदार मानता आया है। यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष पर बात करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इसके शांतिपूर्ण समाधान के लिए तैयार हैं और अब चुनौती कीव को इसके लिए राजी करने की है। उन्होंने यूरोपीय संघ के देशों को मध्यस्थ के रूप में खारिज करते हुए कहा कि वे यूक्रेन को हथियार मुहैया कराने के बजाय उसे समझौते के लिए राजी करें। पश्चिम एशिया संकट पर रूस ने तनाव कम करने वाले किसी भी निर्णय का समर्थन करने की बात कही। भारत और रूस की दोस्ती दुनिया की सबसे पुरानी और मजबूत साझेदारियों में से एक है, जो हर विपरीत परिस्थिति में और मजबूत होकर उभरी है।
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