South Korea14 साल से कम उम्र के बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट करेगा बंद!
- किशोरों में सोशल मीडिया का अत्याधिक इस्तेमाल अब बन चुका है वैश्विक समस्या
सोल। दक्षिण कोरिया का मीडिया नियामक आयोग 14 साल और उससे कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर बैन लगाने पर विचार कर रहा है। किशोरों में सोशल मीडिया के बढ़ते और अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह कदम उठाया जा रहा है। कोरिया मीडिया एंड कम्युनिकेशंस कमीशन के अध्यक्ष ने एक कार्यक्रम में कहा कि किशोरों द्वारा सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल अब वैश्विक समस्या बन चुका है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अध्यक्ष ने कहा कि हम चरणबद्ध तरीके से ऐसी योजना पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत 14 साल से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने से रोका जाएगा। साथ ही 14 से 19 साल के किशोरों के लिए ऐसे डिजाइन और एल्गोरिदम के संपर्क को सीमित किया जाएगा, जो उन्हें सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राष्ट्रीय संसद में करीब सात विधेयक विचाराधीन हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने 2011 में लागू शटडाउन लॉ का उदाहरण दिया, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक ऑनलाइन गेम खेलने पर रोक थी। बाद में इस कानून की आलोचना हुई कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और गेमिंग उद्योग को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद जनवरी 2022 में इस कानून को खत्म कर दिया गया था। दक्षिण कोरिया का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब दुनिया के कई देश बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित करने के लिए कानूनी कदम उठा रहे हैं।
यूरोपीय संघ ने घोषणा की है कि वह गर्मियों के बाद बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित करने के लिए नया कानून पेश करेगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है। इससे पहले जून में ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने इसे देश के लिए एक बड़ा कदम बताया था। स्टार्मर ने कहा था कि सोशल मीडिया ब्रिटेन के बच्चों को असुरक्षित बना रहा है और वे इससे बेहतर माहौल के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद यह फैसला लिया है।
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