रिश्तों में दूरी आती है, तो प्यार की कीमत बढ़ जाती है : Shehnaaz Gill
मुंबई। अपनी आगामी पंजाबी फिल्म इश्कनामा को लेकर लोकप्रिय अभिनेत्री शहनाज गिल चर्चा में हैं। शहनाज ने फिल्म की रिलीज से पहले प्यार और रिश्तों की जटिलताओं पर अपने विचारों को खुलकर साझा किया। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि जब दो लोगों के बीच भौगोलिक या भावनात्मक दूरी आती है, तो कई बार प्यार की अहमियत और अधिक बढ़ जाती है। यह दूरी सामने वाले की उपस्थिति की कमी शिद्दत से महसूस होने लगती है। हालांकि, दूरी के साथ ही रिश्तों में कुछ अनिश्चितताएं और शक भी पैदा हो सकते हैं, जो संबंधों की नींव को हिला सकते हैं। जब शहनाज से पूछा कि क्या दूरी प्यार को मजबूत बनाती है या धीरे-धीरे रिश्ते को कमजोर कर देती है, तो इस पर उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया, जब रिश्तों में दूरी आती है, तो प्यार की कीमत बढ़ जाती है। यह सच है कि दूरी अक्सर दिलों को और करीब ला देती है, क्योंकि इंसान को सामने वाले की अहमियत और अधिक महसूस होने लगती है। लेकिन हां… यह भी सच है कि आपको यह नहीं पता होता कि दूसरा व्यक्ति आपकी अनुपस्थिति में क्या कर रहा है। इसलिए दूरी के साथ शक और अनिश्चितता भी बढ़ सकती है, जो रिश्ते के लिए एक चुनौती बन जाती है। शहनाज ने आगे कहा कि किसी भी रिश्ते में प्यार और भरोसा दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं।
दूरी कई बार रिश्ते की गहराई और मजबूती को समझने का एक अवसर देती है, लेकिन साथ ही यह भरोसे की एक कठिन परीक्षा भी बन सकती है, जिसे हर रिश्ते को पास करना होता है। फिल्म इश्कनामा एक सच्ची प्रेम कहानी पर आधारित है, जो निम्मा और नसीमा नामक वास्तविक जीवन के प्रेमी जोड़े के भावनात्मक सफर को दर्शाती है। फिल्म की पृष्ठभूमि 1981 से 1988 के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास स्थापित है, जो इसे एक ऐतिहासिक रोमांटिक ड्रामा बनाती है और प्रेम की सीमाओं को चुनौती देती है। इंटरव्यू में जब शहनाज से पूछा गया कि आज के दौर में, जब लोग डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए अपने लिए पार्टनर तलाश रहे हैं, क्या ऐसे समय में निम्मा और नसीमा जैसा शुद्ध और निस्वार्थ प्रेम संभव है, तो इस सवाल पर शहनाज ने दृढ़ता से कहा कि प्यार का तरीका और माध्यम समय के साथ बदल सकता है, लेकिन उसकी मूल भावना और गहराई हमेशा वही रहती है।
उन्होंने स्पष्ट किया, मुझे लगता है कि चाहे प्यार का कोई भी स्वरूप हो या उसे व्यक्त करने का कोई भी तरीका, लेकिन अगर उसमें सच्चा प्रेम है, तो वह जीवन भर साथ रहता है और हर बाधा को पार कर जाता है। प्यार आज के जमाने का हो या पुराने समय का, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। प्यार को किसी एक दौर, माध्यम या तरीके से बांधा नहीं जा सकता, क्योंकि यह एक सार्वभौमिक भावना है। बता दें कि इश्कनामा का निर्देशन प्रतिभाशाली अरविंदर एस. खैरा ने किया है, जबकि फिल्म का निर्माण सौरभ राणा और रवनीत कौर चहल ने मिलकर किया है। यह फिल्म प्रसिद्ध किताब हिंद पाक बॉर्डरनामा से प्रेरित एक मार्मिक कहानी को पर्दे पर लाती है। फिल्म में जय रंधावा, शहनाज गिल और सौरभ सचदेवा के साथ कई अन्य कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।
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