थाईलैंड के Supermarkets में मिलता है केले के पत्तों में सामान
बैंकॉक। प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या निपटने थाईलैंड के सुपरमार्केट ने प्रभावी कदम उठाया है, जो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने प्लास्टिक पैकेजिंग पर रोक लगाते हुए केले के पत्तों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। अब फल, सब्जियां और अन्य सामान केले के पत्तों में लपेटकर ग्राहकों को दिया जा रहा है, जिससे प्लास्टिक के कचरे को कम करने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगी है। थाईलैंड के कई सुपरमार्केट चेन ने प्लास्टिक बैग और रैप की जगह केले के पत्तों को अपनाया है। केले के पत्ते बड़े, मजबूत और प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होते हैं। इन्हें आसानी से साफ किया जा सकता है और इनमें सामान पैक करने के बाद इन्हें सीधे खाद में बदला जा सकता है। यह पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल है और कुछ ही हफ्तों में मिट्टी में मिल जाता है, जिससे पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
यह पहल कई कारणों से सफल हो रही है। केले के पत्ते थाईलैंड में आसानी से उपलब्ध हैं क्योंकि केला वहां की प्रमुख फसल है। फल तोड़ने के बाद पौधे की पत्तियां और तने अक्सर बेकार हो जाते हैं। इन्हें पैकेजिंग में इस्तेमाल करके कृषि अपशिष्ट को उपयोगी बनाया जा रहा है, जिससे न केवल प्लास्टिक का उपयोग कम हुआ है, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिल रहा है। लोगों की प्रतिक्रिया भी बेहद सकारात्मक है। कई ग्राहक कह रहे हैं कि यह तरीका न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि सामान को ताजा भी रखता है। केले के पत्ते नमी सोखते हैं और प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुण रखते हैं, जिससे खराब होने की संभावना कम होती है। थाईलैंड जैसे देश जहां पर्यटन और कृषि महत्वपूर्ण हैं, वहां प्लास्टिक प्रदूषण समुद्रों और वन्यजीवों के लिए एक गंभीर खतरा बन गया था।
इस पहल से प्लास्टिक कचरा कम होने की उम्मीद है, और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसे बड़े स्तर पर अपनाया जाए तो सालाना हजारों टन प्लास्टिक बचाया जा सकता है। यह पहल विश्व स्तर पर चर्चा में है और कई देशों के पर्यावरण कार्यकर्ता इसे एक मिसाल बता रहे हैं। भारत में भी कुछ जगहों पर केले के पत्तों में खाना परोसने की परंपरा है। अगर सुपरमार्केट और किराना दुकानें इसे अपनाएं तो प्लास्टिक कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसमें चुनौतियां भी हैं। केले के पत्ते प्लास्टिक जितने टिकाऊ नहीं होते, जिससे भारी सामान या लंबी दूरी की डिलीवरी में समस्या हो सकती है।
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