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रुई की तरह दिखने वाले बादल का वजन पांच लाख Kilograms, फिर भी नहीं गिरते

रुई की तरह दिखने वाले बादल का वजन पांच लाख Kilograms, फिर भी नहीं गिरते

  • बादल के अंदर मौजूद छोटी बूंदें आपस में टकराती रहती हैं, जुड़कर हो जाती हैं बड़ी

नई दिल्ली। आसमान में तैरते हुए बादल दिखने में रुई के छोटे टुकड़ों जैसे लगते हैं। ऐला लगता है कि इनमें वजन ही नहीं होगा। रिसर्च में पता चला है कि एक सामान्य बादल का वजन करीब पांच लाख किलोग्राम होता है। यह दो पूरी लोड बोइंग हवाई जहाजों के बराबर है। तूफान वाले बादलों का वजन तो इससे भी कई गुना ज्यादा होता है। वे एम्पायर स्टेट बिल्डिंग से भी भारी होते हैं। इतने भारी होने के बाद भी ये अचानक जमीन पर नहीं गिरते। आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि यह कैसे मुमकिन है। इसका जवाब बादलों के कुल वजन में नहीं छिपा है। इसके पीछे पानी की छोटी बूंदों का अजीब व्यवहार काम करता है। 


बादल आसमान में पानी का कोई एक बड़ा टुकड़ा नहीं होते हैं। यह लाखों-करोड़ों छोटी बूंदों या बर्फ के कणों से मिलकर बनते हैं। ये कण बहुत बड़े इलाके में फैले रहते हैं। वैज्ञानिक बादलों का वजन मापने के लिए लिक्विड वाटर कंटेंट का इस्तेमाल करते हैं। इसका मतलब है कि एक क्यूबिक मीटर में कितना पानी मौजूद है। इसके बाद पूरे बादल के आकार से इसका गुणा किया जाता है। एक सामान्य बादल आसानी से एक क्यूबिक किलोमीटर का इलाका घेर लेता है। इतने बड़े स्पेस में पानी की मात्रा मिलकर पांच लाख किलोग्राम तक पहुंच जाती है। काले और घने बादलों में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसी वजह से वह खतरनाक हो जाते हैं।
नासा के वैज्ञानिकों ने कहा कि बादल की एक बूंद का साइज सिर्फ दस माइक्रोन होता है। यह साइज बारिश की एक सामान्य बूंद से बहुत ज्यादा छोटा है। इतनी छोटी बूंदों पर ग्रेविटी यानी गुरुत्वाकर्षण बल का असर ना के बराबर होता है। हवा में गिरने वाली हर चीज एक समय बाद टर्मिनल वेलोसिटी पर पहुंच जाती है। यह वह स्पीड है जहां हवा का दबाव ग्रेविटी के असर को खत्म कर देता है। इन नन्ही बूंदों के लिए यह स्पीड एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड से भी कम होती है। इस बेहद धीमी स्पीड के कारण बूंदें हवा में रुकी हुई लगती हैं।


बादल हमेशा उसी जगह बनते हैं जहां हवा ऊपर की तरफ जा रही हो। सामान्य दिनों में हवा ऊपर की तरफ बहुत आराम से चलती है। तूफान के समय यह हवा कई मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से ऊपर भागती है। इस ऊपर उठती हवा को साइंस की भाषा में अपड्राफ्ट कहा जाता है। यह अपड्राफ्ट एक धीमे एलीवेटर या लिफ्ट की तरह काम करता है। यह हवा पानी की बूंदों को लगातार ऊपर की तरफ धकेलती रहती है। ग्रेविटी इन्हें जितना नीचे खींचती है, हवा उससे तेज ऊपर भेज देती है। इसी वजह से बादल बिना गिरे घंटों आसमान में तैरते रहते हैं।आसमान में कोई भी बादल हमेशा के लिए नहीं टिक सकता है, जो नियम बादलों को तैरना सिखाता है, वही बारिश का कारण भी बनता है। बादल के अंदर मौजूद छोटी बूंदें आपस में लगातार टकराती रहती हैं। टकराने से ये बूंदें आपस में जुड़कर बड़ी होने लगती हैं। जब एक बूंद का साइज दस माइक्रोन से बढ़कर एक मिलीमीटर हो जाता है, तो उसका वजन दस लाख गुना बढ़ जाता है। इस बड़े साइज के कारण उसकी टर्मिनल वेलोसिटी भी अचानक बढ़ जाती है। अब वह बूंद एक सेंटीमीटर के बजाय कई मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से गिरने लगती है। हवा का अपड्राफ्ट इस भारी वजन को संभाल नहीं पाता है। इसके बाद ही शांत दिखने वाला बादल भारी बारिश में बदल जाता है।

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