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  • Wednesday, 15 July 2026
संगीत परिवार में जन्मीं थी Sulakshana Pandit, दर्द भरी थी जिंदगी

संगीत परिवार में जन्मीं थी Sulakshana Pandit, दर्द भरी थी जिंदगी

मुंबई। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार में जन्मीं अभिनेत्री और पार्श्व गायिका सुलक्षणा पंडित बचपन से ही संगीत के माहौल में पली-बढ़ीं। सुलक्षणा पंडित ने अपने अभिनय और मधुर आवाज के दम पर फिल्म जगत में अलग पहचान बनाई। उनके पिता और चाचा शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार थे, जबकि उनके भाई जतिन और ललित आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सफल संगीतकार जोड़ी के रूप में स्थापित हुए। जतिन-ललित ने दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, कुछ कुछ होता है और मोहब्बतें जैसी सुपरहिट फिल्मों में यादगार संगीत दिया। सुलक्षणा पंडित ने बेहद कम उम्र में ही पार्श्व गायन की शुरुआत कर दी थी। मात्र नौ वर्ष की आयु में उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और वर्ष 1967 में फिल्म तकदीर के गीत सात समुंदर पार से में लता मंगेशकर के साथ अपनी आवाज देकर पहचान हासिल की। इसके बाद उन्होंने लगभग 70 से अधिक फिल्मों में गीत गाए।

मौसम मौसम लवली मौसम, जब आती होगी याद मेरी, बेकरार दिल तू गाए जा, प्यारे-प्यारे से लगते हैं आप, परदेसिया तेरे देश में, दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है और तुम जो मिल गए जैसे कई लोकप्रिय गीतों ने उन्हें एक सफल गायिका के रूप में स्थापित किया। वर्ष 1975 में फिल्म संकल्प के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। गायन के साथ-साथ सुलक्षणा पंडित ने अभिनय में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने वर्ष 1975 में अभिनेता संजीव कुमार के साथ फिल्म उलझन से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके बाद वह हेराफेरी, अपनापन, फांसी, वक्त की दीवार, दो वक्त की रोटी और धर्म कांटा जैसी कई फिल्मों में नजर आईं।


 उन्होंने जीतेंद्र, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा और संजीव कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया और 1970 तथा 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल रहीं। सुलक्षणा पंडित की निजी जिंदगी उतनी सुखद नहीं रही, जितनी उनकी पेशेवर सफलता थी। फिल्म उलझन की शूटिंग के दौरान उन्हें अभिनेता संजीव कुमार से प्रेम हो गया था। उन्होंने विवाह का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन संजीव कुमार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इस घटना ने उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचाया। वर्ष 1985 में संजीव कुमार के निधन और उसके कुछ समय बाद अपनी मां को खो देने के बाद वह पूरी तरह टूट गईं। इन घटनाओं के बाद उन्होंने विवाह न करने का फैसला किया और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से भी दूरी बना ली। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में सुलक्षणा पंडित सार्वजनिक जीवन से लगभग दूर रहीं। उनकी सुरीली आवाज, प्रभावशाली अभिनय और सादगी भरा व्यक्तित्व आज भी सिने प्रेमियों के दिलों में जीवित है। 

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