Brain में धंसा त्रिशूल निकाल डॉक्टरों ने बचाई 14 वर्षीय बालक की जान
- जेएएच अस्पताल में न्यूरोसर्जरी और जनरल सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने किया सफल ऑपरेशन
ग्वालियर। ग्वालियर के जीआर मेडिकल कॉलेज एवं जेएएच समूह अस्पताल के चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 14 वर्षीय बालक के मस्तिष्क और पैर में धंसे त्रिशूल को सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचा ली। जटिल सर्जरी के बाद बालक की स्थिति सामान्य है और उसकी दृष्टि भी सुरक्षित है।जानकारी के अनुसार छतरपुर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र निवासी 14 वर्षीय शिवम माता की मढ़िया पर खेलते समय ऊंचाई से नीचे रखे त्रिशूल पर गिर गया था। हादसे में त्रिशूल का एक सिरा उसकी बाईं आंख के रास्ते मस्तिष्क में प्रवेश कर गया, जबकि दूसरा सिरा उसके बाएं पैर में धंस गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में उसे ग्वालियर के जेएएच ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
अस्पताल में चिकित्सकों ने सीटी स्कैन, सीटी एंजियोग्राफी सहित अन्य आवश्यक जांचें कर मरीज की स्थिति का आकलन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यूरोसर्जरी एवं जनरल सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार की। 26 जून को न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अविनाश शर्मा के नेतृत्व में प्रो. डॉ. एम.एस. मूंदल, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. अनिल शर्मा सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने कई घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान त्रिशूल को सुरक्षित बाहर निकाल दिया। सर्जरी के दौरान संभावित रक्तस्राव और संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित करने के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। सफल ऑपरेशन के बाद बालक पूरी तरह होश में है। उसके हाथ-पैर सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं तथा उसकी दृष्टि भी सुरक्षित है। चिकित्सकों ने इस सफलता का श्रेय आधुनिक चिकित्सा तकनीक, सटीक पूर्व-योजना, विभिन्न विभागों के समन्वय और टीमवर्क को दिया है।
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