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  • Thursday, 29 October 2026
Trump की चेतावनी के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भेजा पत्र, अमेरिका-ईरान जंग के बीच तुर्की में बैठक की संभावना

Trump की चेतावनी के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भेजा पत्र, अमेरिका-ईरान जंग के बीच तुर्की में बैठक की संभावना

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के मद्देनजर एक बार फिर संघर्ष की आशंका गहराती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो उस पर फिर से सैन्य हमला किया जा सकता है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रुकी हुई कूटनीतिक बातचीत को दोबारा पटरी पर लाना है। अमेरिकी प्रशासन खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य तैयारियां भी तेजी से बढ़ा रहा है, जिसमें हथियारों का भंडार जुटाना, लड़ाकू विमानों को सतर्क रखना और इजरायल की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली भेजना शामिल है।


इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कतर, पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देश सक्रिय रूप से मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं। एक प्रस्ताव के तहत इस बात पर चर्चा चल रही है कि यदि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को दोबारा लौटने की अनुमति दे दे, तो अमेरिका कुछ प्रतिबंधों में ढील दे सकता है, जिससे ईरान को तेल बेचने और मानवीय सहायता के लिए धन प्राप्त करने की राहत मिल सके। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने भी सितंबर 2025 के काहिरा समझौते को फिर से लागू करने का समर्थन किया है। हालांकि अभी तक किसी अंतिम शांति समझौते की शर्तें तय नहीं हो पाई हैं, क्योंकि दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है, लेकिन वह कूटनीति को भी एक मौका देना चाहता है। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, ईरान ने इन मध्यस्थ प्रस्तावों पर अपने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की मंजूरी लेने की बात कही है। मध्य पूर्व में जारी तनाव को थामने के लिए चार नवंबर से पहले तुर्की में एक अहम बैठक संभावित है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, नौसैनिक प्रतिबंध हटाने और परमाणु मुद्दों पर बातचीत जैसे गंभीर बिंदुओं पर चर्चा हो सकती है। यह बैठक क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

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