कपिल से प्रेरित होकर क्रिकेट खेलना शुरु किया था : Harbhajan
चंडीगढ़। दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अपने करियर के शुरुआती दिनों के संघर्षों और निजी चुनौतियों को याद किया। हरभजन ने कहा कि तब महान ऑलराउंडरों में से एक कपिल देव से प्रेरित होकर उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था और उन्हीं की तरह देश के लिए कुछ करने का सपना देखा था। मात्र 17 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के बाद, उन्हें जल्द ही अपने एक्शन को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा और टीम से बाहर कर दिया गया। यह उनके लिए एक बड़ा झटका था, जिसने वह बेहद निराश हुए थे। तब उन्हें लगा था कि उनका क्रिकेट करियर शुरू होने से पहले ही शायद खत्म हो गया है। हालांकि, ऐसे कठिन समय में उनके परिवार ने, विशेषकर उनकी मां ने, उन्हें भावनात्मक और मानसिक रूप से पूरा सहयोग दिया। इसी अटूट समर्थन की बदौलत वह फिर से मैदान पर वापसी करने में सफल रहे थे। इससे वह अपने अपने बचपन के सपने को साकार करने की राह पर निकल गये।
उन्होंने नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) से निकाले जाने के अपने अनुभव को भी साझा किया। हरभजन ने बताया कि उन्हें एनसीए से बाहर किए जाने पर काफी दुख हुआ था, क्योंकि यह घटना तब हुई जब उन्होंने अपने और कुछ अन्य साथी खिलाड़ियों के हितों की रक्षा में आवाज़ उठाई थी। यह प्रसंग उनके मजबूत चरित्र, दृढ़ निश्चय और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के उनके विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। हरभजन अपनी आक्रामक और जुझारू शैली के लिए भी जाने जाते थे, विशेषकर जब वे मैदान पर थे। उन्होंने अपनी इस रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, जब आप ऑस्ट्रेलिया जैसी विश्व स्तरीय और बेहद प्रतिस्पर्धी टीम के खिलाफ उतरते हैं, तो आपको उनके जैसा ही सख्त बनना पड़ता है। हरभजन के अनुसार, मैदान पर एक आक्रामक रवैया अपनाना और विरोधी खिलाड़ियों से मौखिक रूप से भिड़ना उनकी खेल रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसका उद्देश्य विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव बनाना और उन्हें असहज करना था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मैदान के बाहर, खास तौर पर ड्रेसिंग रूम में, उनका स्वभाव बेहद मजाकिया, मिलनसार और शांत रहता था, जो मैदान पर उनकी तेजतर्रार और आक्रामक छवि से बिल्कुल विपरीत था।
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