हालात-ए-Pakistan: कफन के लिए भी कर्ज लेने को मजबूर हो रहे लोग
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों के लिए सिर्फ रोजमर्रा का खर्च उठाना ही नहीं, बल्कि अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करना भी आर्थिक चुनौती बन गया है। खासकर रावलपिंडी जैसे शहरों में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अंतिम संस्कार का खर्च जुटाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। सरकार भले ही अर्थव्यवस्था में सुधार और विकास के आंकड़े पेश कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। रावलपिंडी में कम आय वाले परिवारों के लिए कफन-दफन का खर्च तेजी से बढ़ा है। पहले स्थानीय लोग और पड़ोसी सामाजिक सहयोग के तहत कब्र खोदने सहित कई काम बिना किसी शुल्क के कर देते थे, लेकिन अब यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है। अधिकांश सेवाओं के लिए भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। दूसरी ओर, शहर के कब्रिस्तानों में जगह की भी भारी कमी हो गई है। कई कब्रिस्तानों में नई कब्रों के लिए स्थान उपलब्ध नहीं होने की चेतावनी तक लगाई जा चुकी है।
जगह की कमी के कारण कई स्थानों पर पुरानी कब्रों का दोबारा उपयोग किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाओं और मृतकों के सम्मान से जुड़े सवाल भी उठने लगे हैं। वर्ष 2023 में महंगाई दर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। जून 2026 में उपभोक्ता महंगाई दर 11.1 प्रतिशत दर्ज की गई, लेकिन भोजन, बिजली, ईंधन और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें कम नहीं होने दी हैं। दूसरी ओर, 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 3 ट्रिलियन रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि विकास कार्यों के लिए केवल 1 ट्रिलियन रुपये आवंटित किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक शर्तों के चलते कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च की गुंजाइश भी सीमित बनी हुई है। आर्थिक वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय के सकारात्मक सरकारी आंकड़ों के बावजूद आम नागरिकों की स्थिति यह संकेत देती है कि आर्थिक सुधारों का लाभ अभी तक समाज के निचले और मध्यम वर्ग तक नहीं पहुंच पाया है।
4 हजार में मिलता है कफन
अंतिम संस्कार से जुड़ी लगभग हर जरूरत की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साधारण कफन खरीदने में 3,000 से 4,000 पाकिस्तानी रुपये खर्च होते हैं, जबकि गुलाब जल, कपूर और फूल जैसी जरूरी सामग्री पर 2,000 से 2,500 रुपये तक खर्च करना पड़ता है। कब्र की जगह, खुदाई और ईंटों से तैयार करने में 40,000 से 45,000 रुपये तक लग रहे हैं। शव को नहलाने की मजदूरी भी 1,000 से 1,500 रुपये तक पहुंच गई है। यदि परिवार पक्की कब्र बनवाना चाहता है तो उस पर 15,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये या उससे अधिक का अतिरिक्त खर्च आता है। इन अनिवार्य खर्चों के कारण कई परिवार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
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