Netanyahu के भाई ने युगांडा के आदमखोर तानाशाह से बचाए थे 102 यहूदी
तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दृढ़ और अडिग छवि के पीछे उनके बड़े भाई योनातन नेतन्याहू की वीरता और सर्वोच्च बलिदान की एक अविस्मरणीय कहानी है। योनातन ने 50 साल पहले युगांडा के खूंखार तानाशाह ईदी अमीन के चंगुल से 102 मासूम यहूदी बंधकों को बचाने के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी, जब उन्होंने अपने सीने पर गोली खाई थी। इस हैरतअंगेज ऑपरेशन की कहानी को उस वक्त के पायलट और ब्रिगेडियर जनरल जोशुआ शानी ने खुद सुनाया है, जिन्होंने अपनी आंखों से सबकुछ देखा था। यह पूरी कहानी तब शुरू हुई जब तेल अवीव से पेरिस जा रही एयर फ्रांस की एक उड़ान को फिलिस्तीनी और जर्मन आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया। विमान को युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट ले जाया गया, जहां उस समय दुनिया का सबसे खूंखार और आदमखोर माना जाने वाला तानाशाह ईदी अमीन राज कर रहा था। ईदी अमीन ने न केवल आतंकियों को पनाह दी, बल्कि अपनी फौज भी उनके समर्थन में खड़ी कर दी। आतंकवादियों ने गैर-इजराइली और गैर-यहूदी यात्रियों को तो छोड़ दिया, लेकिन 100 से अधिक इजराइली और यहूदी मुसाफिरों को टॉर्चर करने के लिए बंधक बना लिया। इजरायल के पास सिर्फ कुछ ही दिनों का वक्त था कि या तो वह तानाशाह और आतंकियों की मांगें मान ले या फिर एक ऐसा खतरनाक सैन्य ऑपरेशन करे जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। इजरायल ने दूसरा विकल्प चुना।
ब्रिगेडियर जनरल जोशुआ शानी ने इस मिशन का किस्सा खुद सुनाया है। उन्होंने बताया कि जब इजरायली सरकार ये तय भी नहीं कर पाई थी कि हमला करना है या नहीं, उनके सी-130 हरक्यूलिस स्क्वाड्रन ने चुपचाप अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी थी। शानी ने बताया कि उनकी टीम ने तुरंत करीब 4,000 किलोमीटर लंबे खतरनाक रूट, ईंधन की जरूरत, रास्ते के रडार और तानाशाह ईदी अमीन की सेना की ताकत का बारीकी से अध्ययन करना शुरू कर दिया था। इसी एडवांस प्लानिंग का नतीजा था कि जब देश के नेताओं ने बातचीत के अलावा दूसरा रास्ता मांगा तो इजराइली वायुसेना ने तुरंत कहा ‘हां बोलिए, हम तैयार हैं’। इस मिशन के लिए इजरायल के चार सी-130 हरक्यूलिस मालवाहक जहाजों को अफ्रीका महाद्वीप के ऊपर से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ाते हुए आगे बढ़ना था ताकि वे किसी भी देश के रडार की पकड़ में न आएं। इन जहाजों में इजरायल के सबसे खतरनाक कमांडो सवार थे, जिनकी अगुवाई एलीट स्पेशल फोर्सेज के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतन्याहू कर रहे थे। उन्होंने ईदी अमीन को बेवकूफ बनाने के लिए हरक्यूलिस विमानों में काली मर्सिडीज और लैंड रोवर गाड़ियां लोड की थीं। युगांडा पहुंचते ही इन गाड़ियों को सीधा टर्मिनल में घुसा दिया गया, जिससे तानाशाह के सैनिक उस तरफ भागे और कमांडो ने 10 लोगों को आसानी से छुड़ा लिया।
हालांकि, कुछ ही मिनटों में युगांडा की सेना को वास्तविकता का भान हो गया और योनातन तथा उनकी टीम के साथ उनकी भीषण मुठभेड़ हुई। कुल 53 मिनट तक चले इस ऑपरेशन के दौरान, योनातन नेतन्याहू आतंकियों और ईदी अमीन के सैनिकों की गोलियों का सामना करते हुए देश के लिए कुर्बान हो गए। शहीद होने से पहले, उन्होंने 102 मासूम नागरिकों को आतंकियों के चंगुल से हमेशा के लिए आजाद करा दिया था। शानी ने बताया, ‘मैं योनी को मिशन से पहले से जानता था और प्लानिंग के दौरान हमारी कई बार बात हुई थी। वो बेहद बहादुर और पक्के इरादों वाले इंसान थे। विमान में हम दोनों की जिम्मेदारियां बंटी हुई थीं; मेरा काम पूरी फोर्स को बिना भनक लगे सुरक्षित एंटेबे एयरपोर्ट के टर्मिनल पर लैंड कराना था और उनका असली काम जमीन पर उतरने के बाद शुरू होना था’।
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