मक्का समझौते में नए देशों के शामिल होने का रास्ता साफ, Pakistani military बोली- किसी पर कोई रोक नहीं
इस्लामाबाद। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए ऐतिहासिक मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर पाकिस्तानी सेना ने एक बड़ा बयान दिया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने साफ किया है कि इस त्रिपक्षीय सैन्य गठबंधन में नए सदस्यों को शामिल करने पर कोई कानूनी या नीतिगत रोक नहीं है। सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति की सोच रखने वाले अन्य देशों का भी इसमें स्वागत है।एक इंटरव्यू में जब यह सवाल किया गया कि क्या बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान भी इस रक्षा समझौते का हिस्सा बन सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई देश क्षेत्रीय शांति और सामूहिक निवारण के विजन को साझा करता है, तो उसके जुड़ने में कोई रुकावट नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते में नए देशों को शामिल करने या न करने का अंतिम फैसला तीनों संस्थापक देशों का शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ही करेगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष नेतृत्व ने 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में इस ऐतिहासिक सामूहिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के अनुच्छेद 2 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि तीनों सदस्य देशों में से यदि किसी एक पर भी कोई बाहरी सैन्य हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ हमला माना जाएगा। ऐसी स्थिति में अन्य सदस्य देश सैन्य और अन्य उपलब्ध साधनों के जरिए तुरंत मदद करेंगे।
यह रक्षा समझौता ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है जब ईरान, पश्चिमी देशों और इजरायल के बीच युद्ध जारी है तथा मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस संवेदनशील माहौल के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने इस महीने दूसरी बार तेहरान का दौरा किया है। इस कूटनीतिक यात्रा में उनके साथ सऊदी अरब के रक्षा मंत्री शहजादा खालिद बिन सलमान और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन भी शामिल रहे। पाकिस्तानी सेना ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही मध्यस्थता की कोशिशों को सावधानीपूर्वक आशावादी करार दिया है। सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि यदि सकारात्मक प्रगति न होती, तो फील्ड मार्शल दो बार तेहरान की यात्रा नहीं करते। हालांकि, उन्होंने क्षेत्र में शांति विरोधी तत्वों की मौजूदगी को लेकर सचेत भी किया है।
सऊदी अरब में अतिरिक्त पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती से जुड़े सवाल पर लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा कि यह कदम पूरी तरह से स्थिति की गंभीरता और दोनों देशों के राजनीतिक नेतृत्व के फैसलों पर निर्भर करेगा। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों की सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही, उन्होंने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान यमन के आंतरिक संघर्ष का हिस्सा नहीं है और वह किसी भी अंतर-अरब या अंदरूनी विवाद से पूरी तरह दूर रहेगा।
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