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  • Friday, 30 October 2026
Finland में खुलेगा दुनिया का पहला परमाणु कचरा भंडार

Finland में खुलेगा दुनिया का पहला परमाणु कचरा भंडार

  • गहराई में सालों तक सुरक्षित रहेगा रेडियोधर्मी कचरा

हेलसिंकी। फिनलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बनने जा रहा है, जहां इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन को स्थायी रूप से जमीन के नीचे सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है। देश के ओनकालो केंद्र को हाल ही में संचालन का लाइसेंस मिलने के बाद इस परियोजना को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। हालांकि, परमाणु कचरे के दीर्घकालिक भंडारण को लेकर सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। केंद्र को कई परीक्षणों और तकनीकी जांच से गुजरना पड़ा, जिसके बाद संचालन की अनुमति दी गई।


दुनिया के अधिकांश देशों में इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन के लिए अब तक स्थायी भंडारण की व्यवस्था नहीं है। इस आमतौर पर विशेष अस्थायी केंद्रों में रखा जाता है। फिनलैंड में ओनकालो परियोजना की शुरुआत करीब 22 साल पहले हुई थी। इस केंद्र में देश के पांच परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले इस्तेमाल किए गए ईंधन को सुरक्षित रखने की क्षमता होगी। इसकी कुल भंडारण क्षमता लगभग 6,500 टन यूरेनियम है।


परमाणु कचरे को सुरक्षित रखने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार की गई है। इसमें पहले इस्तेमाल हो चुके ईंधन को विशेष तांबे के कंटेनरों में रखा जाएगा। इन कंटेनरों को जंग और क्षरण से बचाने के लिए तैयार किया गया है। इसके बाद इन्हें जमीन के काफी नीचे चट्टानों में बनाए गए निर्धारित स्थानों पर रखा जाएगा। कंटेनरों के आसपास विशेष प्रकार की मिट्टी भरी जाएगी और पूरी संरचना को इस तरह बंद किया जाएगा कि रेडियोधर्मी पदार्थ बाहर न निकल सकें। इस व्यवस्था का उद्देश्य हजारों वर्षों तक कचरे को मनुष्यों और पर्यावरण से अलग रखना है।


परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, समय के साथ इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन की रेडियोधर्मिता घटती जाएगी। हालांकि, इसके खतरनाक स्तर से नीचे आने में बहुत लंबा समय लग सकता है। इसलिए भंडारण व्यवस्था को हजारों वर्षों तक सुरक्षित बनाए रखना इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती है। बात दें कि परमाणु संयंत्रों को बंद करने, पुराने उपकरणों को हटाने और रेडियोधर्मी कचरे का सुरक्षित निपटान करने में भारी खर्च आता है। इसके लिए उन्नत तकनीक, पर्याप्त वित्तीय संसाधन और मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी है। लापरवाही से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। वर्ष 1986 की चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना परमाणु सुरक्षा के महत्व का बड़ा उदाहरण है। दुनिया के कई देशों में परमाणु रिएक्टर बंद किए जा चुके हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस और रूस प्रमुख हैं। इसके बाद परमाणु कचरे का दीर्घकालिक और सुरक्षित निपटान वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। फिनलैंड का ओनकालो केंद्र इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

 

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