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आतंरिक मसलों का हल तुर्की से निकलवाना चाहता है Pakistan

आतंरिक मसलों का हल तुर्की से निकलवाना चाहता है Pakistan

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में मचे गदर और आंतरिक अशांति के बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तुर्की यात्रा ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस वक्त पाकिस्तान जिस संकट से गुजर रहा है, ऐसे में शरीफ का तुर्की पहुंचना कई कूटनीतिक सवाल खड़े करता है। यात्रा के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप एर्दोगान के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने एक-दूसरे के प्रमुख मुद्दों पर दृढ़ समर्थन का आश्वासन दिया। यह यात्रा इस बात पर चर्चा का विषय बन गई है कि क्या पाकिस्तान अब अपने आंतरिक मसलों का हल निकालने के लिए तुर्की की मदद लेने की फिराक में है। दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आपसी समझौते को दोहराया, जिसमें एर्दोगान ने पाकिस्तान के क्षेत्र में शांति प्रयासों की सराहना करते हुए कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताया। जवाब में शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्की एक ही आत्मा के दो दिल हैं और दोनों देश मुश्किल समय में हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। यह सर्वविदित है कि पूरी दुनिया में इस्लाम के नाम पर ये दोनों देश अपने रणनीतिक हित साधने की कोशिश में लगे रहते हैं। अतीत में भी, जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान में कार्रवाई की थी, तो तुर्की ही इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान का साथ देने सबसे पहले आगे आया था।

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कश्मीर मुद्दे पर डील मानी जा रही है। पाकिस्तान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान तुर्की गणराज्य उत्तरी साइप्रस के मुद्दे पर तुर्की के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ा रहेगा, जैसा कि वह पिछले कई दशकों से करता आया है। लेकिन यह सब कुछ पाकिस्तान मुफ्त में नहीं करेगा; इसके बदले में उसे जम्मू- कश्मीर के मुद्दे पर तुर्की से वही समर्थन चाहिए होगा। शहबाज भले ही पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को आजाद कहते हैं, लेकिन इस वक्त वहां पाकिस्तानी फौज जो अत्याचार कर रही है, उसमें उसे तुर्की का साथ चाहिए। पाकिस्तान हमेशा से ही कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना चाहता है, जबकि भारत इसे द्विपक्षीय मुद्दा मानता है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार करता है। यह यात्रा पाकिस्तान के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, वहीं तुर्की उत्तरी साइप्रस को लेकर अलगाववाद और मान्यता के संघर्ष से जूझ रहा है। दोनों देश एक-दूसरे के इन संवेदनशील मुद्दों पर पारस्परिक समर्थन देकर अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति अपना रहे हैं। 

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