Iran में तख्तापलट का ख्वाब देख रहे Trump के खिलाफ ही लाखों लोग सड़कों पर उतरे
-‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत अमेरिका के 3200 स्थानों पर हुआ विरोध प्रदर्शन
वाशिंगटन। ईरान में तख्तापलट और बगावत का ख्वाब देख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ा रहा है। ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत अमेरिका के 3,200 स्थानों पर 90 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। तानाशाही रवैये और युद्ध नीतियों के खिलाफ भड़का यह आक्रोश अब ट्रंप की कुर्सी के लिए खतरा बन गया है। अमेरिका में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जन-आक्रोश की एक नई लहर देखने को मिली है। शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों समेत दुनिया के कई प्रमुख शहरों में नो किंग्स विरोध प्रदर्शन हुए। आयोजकों का दावा है कि यह अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक है। इस बार के प्रदर्शनों के केंद्र में तीन मुख्य मुद्दे हैं- पिछले चार हफ्तों से ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का कड़ा विरोध। विशेष रूप से मिनेसोटा में संघीय एजेंटों द्वारा रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की मौत के बाद गुस्सा चरम पर है। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन निरंकुश तरीके से काम कर रहा है और संवैधानिक मर्यादाओं को चुनौती दे रहा है। यह आंदोलन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। देशभर में 3,200 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर हजारों की भीड़ ने लोकतंत्र बचाओ के नारे लगाए। वहीं मिनेसोटा में यह विरोध का प्रतीकात्मक केंद्र बना। यहां रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने गाना गाकर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जो अप्रवासन कार्रवाई में मारे गए थे। न्यूजर्सी में समृद्ध उपनगरीय इलाकों में भी ‘सॉकर मॉम्स’ और कामकाजी वर्ग सड़कों पर उतरा जो पारंपरिक रूप से राजनीति से दूर रहते थे। इस आंदोलन का नाम ही इसके उद्देश्य को स्पष्ट करता है कोई राजा नहीं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति ट्रंप की ‘कार्यकारी शक्तियों’ के बढ़ते उपयोग को राजशाही के समान मानते हैं।
उनका तर्क है कि अमेरिका एक लोकतंत्र है जहां कानून सर्वोपरि है न कि कोई व्यक्ति। रिपोर्ट के मुताबिक निश्चित रूप से यह प्रदर्शन आगामी मिड-टर्म चुनावों से पहले हो रहे हैं। न्यूजर्सी जैसे राज्यों में जहां रिपब्लिकन मजबूत थे अब मतदाता का डेमोक्रेटिक की तरफ झुकाव दिखा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपनगरीय क्षेत्रों में बढ़ता यह आक्रोश कांग्रेस पर रिपब्लिकन नियंत्रण को खत्म कर सकता है। लंदन, पेरिस और रोम जैसे शहरों में भी ट्रंप विरोधी रैलियां निकाली गई। यह दर्शाता है कि अमेरिकी विदेश नीति खासकर ईरान युद्ध को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता और विरोध बढ़ रहा है। दुनिया भर के लोग दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। जहां एक ओर डेमोक्रेटिक सीनेटर बर्नी सैंडर्स और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने इन प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया, वहीं व्हाइट हाउस ने इसे राजनीति से प्रेरित करार दिया है। लॉस एंजिल्स जैसे कुछ स्थानों पर झड़पें भी हुईं जहां पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कुल मिलाकर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
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