Britain में भारतीय ट्रांसजेंडर छात्र बना स्कॉटलैंड का सांसद
ब्रिटेन में दो फाड़ होती राजनीति के आ रहे परिणाम
लंदन। ब्रिटेन से हाल के दिनों में सामने आईं दो विपरीत खबरों ने वैश्विक राजनीति और सामाजिक ढांचे को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस नीतिगत बदलाव का सबसे सुखद परिणाम भारतीय छात्र क्यू मणिवन्नन की जीत के रूप में सामने आया है। मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले मणिवन्नन यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट ऐंड्रूज से पीएचडी कर रहे थे। स्कॉटिश ग्रीन्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने न केवल जीत दर्ज की, बल्कि छात्र वीजा पर रहते हुए सांसद बनने वाले पहले भारतीय और ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि बनकर इतिहास रच दिया। मणिवन्नन की यह जीत जहां एक वर्ग के लिए लोकतंत्र की जीत है, वहीं दूसरा वर्ग इसे लेकर सवाल उठा रहा है। ब्रिटेन की जमीन पर उपजी ये दो अलग-अलग धाराएं भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। एक तरफ इंग्लैंड में प्रवासियों के प्रति स्थानीय लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच रहा है, तो दूसरी तरफ स्कॉटलैंड ने समावेशी लोकतंत्र की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ये दोनों ही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में पहचान की राजनीति और प्रवास वैश्विक विमर्श के सबसे संवेदनशील मुद्दे बनने वाले हैं। इंग्लैंड में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय परिषद चुनावों के परिणामों ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। सत्ताधारी लेबर पार्टी को इन चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्य विपक्षी दल कंजरवेटिव पार्टी को भी इसका सीधा लाभ नहीं मिला। इस चुनाव में सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी रिफॉर्म यूके पार्टी, जिसने अपने कट्टर प्रवासी-विरोधी एजेंडे के दम पर जबरदस्त बढ़त हासिल की। इस पार्टी का स्पष्ट मानना है कि अवैध रूप से आने वाले लोग देश की संस्कृति और संसाधनों के लिए खतरा हैं। विशेषकर नावों के जरिए पहुंचने वाले सीरिया, इराक, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों के साथ-साथ अब भारतीय मूल के लोगों को भी इस विरोध की आंच झेलनी पड़ रही है। इसके बिल्कुल विपरीत, स्कॉटलैंड एक अलग ही रास्ते पर चलता दिखाई दे रहा है। स्कॉटिश सरकार ने वर्ष 2020 में एक क्रांतिकारी कानून पारित किया था, जिसके तहत वहां रहने वाले और टैक्स देने वाले विदेशी नागरिकों को मतदान का अधिकार दिया गया। इसी कानून का विस्तार करते हुए विदेशी नागरिकों को चुनाव लड़ने की अनुमति भी दी गई।
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