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Ukraine को मिल रही नाटो से ताकत तो क्या कमजोर हुआ रूस?

Ukraine को मिल रही नाटो से ताकत तो क्या कमजोर हुआ रूस?

न्यूयार्क। फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को चार वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। शुरुआत में जहां सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान था कि रूस कुछ ही दिनों में यूक्रेन पर निर्णायक बढ़त हासिल कर लेगा, वहीं अब युद्ध का परिदृश्य काफी बदल चुका है। लंबे संघर्ष के बाद रूस को सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि देश एक कठिन दौर से गुजर रहा है। युद्ध के दौरान क्रीमिया, जिसे रूस ने वर्ष 2014 में अपने नियंत्रण में लिया था, अब लगातार यूक्रेनी हमलों का केंद्र बना हुआ है। यूक्रेन ने लंबी दूरी की मिसाइलों, ड्रोन और समुद्री हमलों के जरिए क्रीमिया में रूसी सैन्य ठिकानों, रसद मार्गों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इससे रूस की आपूर्ति व्यवस्था और सैन्य संचालन पर दबाव बढ़ा है। रूस के कुछ क्षेत्रों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं।

कई स्थानों पर पेट्रोल और डीजल के लिए लंबी कतारें देखी गई हैं, जबकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और बढ़ते रक्षा खर्च ने रूसी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाला है। युद्ध के कारण बड़ी संख्या में संसाधन सैन्य अभियानों में खर्च हो रहे हैं, जिसका असर आम नागरिकों और घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, यूक्रेन को अमेरिका और यूरोपीय देशों से लगातार सैन्य, आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलती रही है। आधुनिक हथियार प्रणालियों, ड्रोन तकनीक, खुफिया सहयोग और वित्तीय समर्थन ने यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत किया है। इसी वजह से यूक्रेन कई मोर्चों पर रूस को चुनौती देने और उसके सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हुआ है।हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि रूस युद्ध हारने की स्थिति में पहुंच गया है। रूस अब भी यूक्रेन के बड़े भूभाग पर नियंत्रण बनाए हुए है और उसके पास पर्याप्त सैन्य संसाधन तथा उत्पादन क्षमता मौजूद है। दूसरी ओर, यूक्रेन भी पश्चिमी सहयोग पर काफी हद तक निर्भर है। युद्ध की दिशा आने वाले महीनों में सैन्य अभियानों, अंतर्राष्ट्रीय समर्थन, आर्थिक परिस्थितियों और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेगी। फिलहाल दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है और किसी त्वरित समाधान के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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