30 हजार से 3.5 लाख तक कैसे पहुंचे हूती लड़ाके?, Saudi Arabia के लिए नया युद्ध संकेत
सना। सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता संघर्ष अब सिर्फ यमन की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। कभी करीब 30 हजार लड़ाकों वाला हूती गुट आज 3.5 लाख तक के सैन्य नेटवर्क का दावा कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस संगठन की ताकत इतनी तेजी से कैसे बढ़ी, उसे इतने लड़ाके कहां से मिले और क्या यह विस्तार सऊदी अरब के लिए एक नए, लंबे युद्ध का संकेत है? यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि हूतियों की ताकत केवल 30 हजार से 3.5 लाख की सीधी भर्ती की कहानी नहीं है। यह अनुमान उनकी नियमित सैन्य इकाइयों, कबायली समर्थकों, स्थानीय लड़ाकों और बड़े मोबिलाइजेशन नेटवर्क को मिलाकर है; इसलिए इसे अधिकतम आकलन मानकर देखना चाहिए, न कि पूरी तरह सत्यापित स्थायी सेना।
हूती आंदोलन ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जे के बाद उत्तर-पश्चिमी यमन के बड़े हिस्से पर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत किया। उसके नियंत्रण वाले इलाकों में यमन की लगभग दो-तिहाई आबादी रहती है। इससे उसे टैक्स वसूली, संस्थाओं, स्थानीय नेटवर्क और युवाओं तक सीधी पहुंच मिली, जो लगातार भर्ती का एक मजबूत आधार बनी। इसके अतिरिक्त, 2015 से सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य हस्तक्षेप और लंबे हवाई हमलों को हूतियों ने विदेशी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध के नैरेटिव में बदला। सैन्य दबाव उन्हें कमजोर करने के बजाय कई जगह नए समर्थक जुटाने का माध्यम बना। अमेरिका के साथ 2025 के संघर्ष विराम के बाद संगठन को अपने ढांचे की मरम्मत, फोर्स को दोबारा संगठित करने और भर्ती बढ़ाने का समय मिला। एक विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब के विरुद्ध प्रतिरोध में जीत की कहानी को घरेलू लामबंदी के लिए सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया। हूती लड़ाकों की संख्या में सबसे तेज उछाल अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद देखा गया। इस दौरान हूतियों ने अपने अभियान को फिलिस्तीन और गाजा के समर्थन से जोड़ा और अल-अक्सा फ्लड नाम से बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया। संयुक्त राष्ट्र के आकलन का हवाला देते हुए मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट ने कहा कि हूती लड़ाकों का अनुमान 2022 के करीब 2.2 लाख से बढ़कर 2024 में 3.5 लाख तक पहुंचा इस तेज उछाल का एक प्रमुख कारण यही भर्ती अभियान और गाजा युद्ध से बना भावनात्मक-राजनीतिक माहौल बताया गया है।
हालांकि, यह विस्तार सिर्फ अपनी इच्छा से भर्ती से नहीं हुआ है। कई रिपोर्टों में जबरन भर्ती और बच्चों को सेना में शामिल करने की बात भी सामने आई है। ईरान ने हूतियों को हथियारों के पुर्जे, तकनीकी जानकारी, ट्रेनिंग और खुफिया सहयोग दिया है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस के अनुसार, ईरानी सहायता ने हूतियों को लंबी दूरी की मिसाइलें, रॉकेट और ड्रोन विकसित और असेंबल करने की क्षमता दी; हूती लड़ाकों को ईरानी नौसैनिक अकादमी और आईआरजीसी से प्रशिक्षण मिलने की भी रिपोर्ट है। लेकिन ईरानी मदद ने मुख्यतः हूतियों की मारक क्षमता बढ़ाई है; लड़ाकों की बड़ी संख्या के पीछे स्थानीय सत्ता, आर्थिक नियंत्रण, धार्मिक प्रचार और युद्ध के दौरान मजबूत भर्ती तंत्र ज्यादा अहम कारण रहे हैं। हूतियों को केवल ईरान का नियंत्रित प्रॉक्सी मानना भी पूरी तस्वीर नहीं देता- वे यमन की अपनी स्थानीय राजनीति, जैदी पहचान और सत्ता-संघर्ष से निकले एक जटिल संगठन हैं।
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