दुनिया पर राज करने वाला Britain अब विभाजन का कर रहा सामना
- वेल्स, स्कॉटलैंड और आयरलैंड यूके से चाहते हैं आजादी, तीनों के समझौते पर हस्ताक्षर
लंदन। जिसके साम्राज्य में का सूरज कभी नहीं डूबता था उस यूनाइटेड किंगडम का अपना राजनीतिक ढांचा आज इतिहास के सबसे बड़े संवैधानिक संकट से जूझ रहा है। एक दौर में दुनिया भर के मानचित्र बदलने और सीमाओं का निर्धारण करने वाले ब्रिटेन को अब खुद अपने ही क्षेत्र में गहरे बिखराव और विभाजन का सामना करना पड़ रहा है। वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का सीधा उद्देश्य लंदन स्थित ब्रिटिश संसद के एकाधिकार को चुनौती देना और तीनों क्षेत्रों के लिए पूर्ण स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह कराने के अधिकारों की मांग करना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वेल्स की राजधानी कार्डिफ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में तीनों क्षेत्रों के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होकर ब्रिटिश पीएम एंडी बर्नहैम और उनकी सरकार को चेतारी दी है। इस ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत करते हुए जारी संयुक्त बयान में वेस्टमिंस्टर की सत्ता प्रणाली पर सीधा हमला बोला गया। इन द्वीपों पर रहने वाले नागरिकों और दुनिया भर से इस घटनाक्रम को देख रहे वैश्विक समुदाय के लिए इससे स्पष्ट कोई संकेत नहीं हो सकता- लंदन से संचालित वेस्टमिंस्टर का युग अब अपने अंतिम चरण में है। रिपोर्ट के मुताबिक तीनों क्षेत्रों के नेताओं का मानना है कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने के बाद से उनके आर्थिक और रणनीतिक हित बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उनका स्पष्ट रुख है कि उनके नागरिकों का समृद्ध और सुरक्षित भविष्य अब यूनाइटेड किंगडम के बजाय फिर से यूरोपीय संघ और वैश्विक साझेदारियों के साथ सीधा जुड़ने में है। इस बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच ब्रिटिश सरकार के पास विकल्प सीमित होते दिख रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश पीएम एंडी बर्नहैम ने हाल ही में संसद के अंदर यह स्वीकार कर संकेत दिए थे कि यदि जनभावना और राजनीतिक सहमति बनती है, तो केंद्र सरकार स्कॉटलैंड को अपनी स्वतंत्रता पर दूसरा जनमत संग्रह कराने की वैधानिक मंजूरी दे सकती है।1998 के ऐतिहासिक गुड फ्राइडे एग्रीमेंट की शर्तों के तहत उत्तरी आयरलैंड के पास यह स्पष्ट संवैधानिक अधिकार मौजूद है कि यदि वहां की जनता ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड गणराज्य के साथ एकीकरण के पक्ष में दिखती है, तो वहां री-यूनिफिकेशन जनमत संग्रह कराया जा सकता है।
इतिहास में यह पहला अवसर है जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड तीनों ही स्वशासित क्षेत्रों में एक साथ स्वतंत्रता-समर्थक और क्षेत्रीय अधिकारों की वकालत करने वाले दल सत्ता की बागडोर संभाल रहे हैं। इस अंदरूनी असंतोष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब और हवा मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया आयरलैंड दौरे में एक बड़ा बयान दे दिया था। ट्रंप ने एक एकीकृत आयरलैंड की अवधारणा का खुले तौर पर समर्थन करते हुए कहा था कि उत्तरी आयरलैंड का आयरलैंड गणराज्य में विलय होना एक शानदार विचार होगा। इस बयान ने न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है, बल्कि वेस्टमिंस्टर पर चौतरफा वैश्विक दबाव बढ़ा दिया है। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंदन सरकार ने इस त्रिपक्षीय समझौते के बाद दूरदर्शी और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यूनाइटेड किंगडम का मौजूदा स्वरूप इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा।
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