Iran जंग...ट्रंप के अधिकारों में कटौती करने का प्रस्ताव पास, ट्रंप के पास वीटो करने का अधिकार
वाशिंगटन। ईरान में जारी युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में तीसरी बार मतदान हुआ, जहाँ युद्ध शक्तियों संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कांग्रेस की अनुमति के बिना सैन्य कार्रवाई जारी रखने की क्षमता पर प्रभावी ढंग से रोक लग सकेगी। इस अहम मतदान में प्रस्ताव 220-204 मतों से पारित हुआ।
इस बार पहले की तुलना में कुछ और रिपब्लिकन सांसद भी अधिकतर डेमोक्रेट सांसदों के साथ युद्ध समाप्त करने के पक्ष में शामिल दिखे। जो इस मुद्दे पर बढ़ती द्विदलीय चिंता को दिखाता है। हालांकि, इस प्रस्ताव के राष्ट्रपति की मेज तक पहुंचने और उनके द्वारा वीटो करने की लगभग पूरी संभावना है, जिससे इसके कानून बनने की राह में बड़ी बाधा खड़ी हो सकती है।
मैसाचुसेट्स के डेमोक्रेट सांसद सेथ मौल्टन, जिन्होंने इराक युद्ध के दौरान नौसैनिक के रूप में सेवा की है और इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहे हैं, ने कदम को संविधान के अनुरूप बताया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे पर सवाल उठाया कि यह युद्ध केवल कुछ हफ्तों तक चलेगा। मौल्टन ने कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस वास्तव में कठिन सवाल पूछे, बजाय इसके कि वह एक और युद्ध समर्थक प्रशासन के अधीन हो जाए।
वहीं, फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद और ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ के अध्यक्ष ब्रायन मैस्त ने डेमोक्रेट्स की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि वे किन सैन्य संसाधनों को हटाना चाहते हैं, जबकि ईरान अब भी खतरा बना हुआ है। मैस्त ने तर्क दिया कि ट्रंप हमेशा चलने वाले युद्धों के खिलाफ हैं और वे ईरान के साथ दशकों से चले आ रहे टकराव को समाप्त कर रहे हैं, यह कहते हुए कि ईरान लगातार अमेरिका के लिए खतरा बना हुआ है और अब बहुत हो गया है।
यह मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान युद्ध पर प्रतिनिधि सभा का आखिरी महत्वपूर्ण मतदान हो सकता है, जो केवल 50 दिन दूर हैं। विदेशों में चल रहा यह संघर्ष आगामी चुनावों में, राजनीतिक अभियानों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, जहां कांग्रेस पर नियंत्रण किस पार्टी का रहेगा, यह तय होगा।
ट्रंप की ओर से 28 फरवरी को शुरु हुआ यह युद्ध करीब सात महीने से जारी है, जिसके दौरान रुक-रुककर घातक मिसाइल हमले होते रहे हैं और पूरे क्षेत्र में भारी उथल-पुथल मची हुई है। ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के चलते मतदाताओं को विशेष रूप से पेट्रोल की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे चुनावों पर असर पड़ने की आशंका है।
खास बात यह है कि ट्रंप ने स्वयं अपने राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को विदेशी युद्धों में शामिल न करने का वादा किया था। ईरान के खिलाफ उनकी कार्रवाइयों का असर उस रिपब्लिकन पार्टी पर भी पड़ रहा है, जिसका प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में नियंत्रण है। जुलाई में किए गए एक सर्वेक्षण से यह सामने आया कि अधिकतर अमेरिकियों का कहना है कि ईरान से युद्ध उचित नहीं था, जो जनता के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
Tags
Comment / Reply From
You May Also Like
Popular Posts
Newsletter
Subscribe to our mailing list to get the new updates!