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  • Tuesday, 27 October 2026
Nana Patekar के साथ जुडी यादों को ताजा किया दीप्ति नवल ने

Nana Patekar के साथ जुडी यादों को ताजा किया दीप्ति नवल ने

मुंबई। बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के साथ जुडी अपनी पुरानी यादों को अभिनेत्री दीप्ति नवल ने ताजा किया है। सोशल मीडिया पर दीप्ति नवल ने फिल्म यात्रा के एक दृश्य की तस्वीर साझा करते हुए उस समय को याद किया, जब दोनों कलाकारों ने निर्देशक गौतम घोष की इस फिल्म में साथ काम किया था।दीप्ति नवल ने इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीर के साथ लिखा, नाना और मेरे बीच का एक पल, गौतम घोष की फिल्म यात्रा से। तस्वीर में अभिनेत्री पारंपरिक नीली नौवारी साड़ी और पीले ब्लाउज में जमीन पर बैठी नजर आती हैं। उनके पास पारंपरिक पत्थर की चक्की रखी हुई है। वहीं, नाना पाटेकर साधारण ऑफ-व्हाइट कपड़ों में दिखाई देते हैं। उनके कंधे पर मरून रंग का कपड़ा रखा है और वह दीप्ति के पास बैठे हुए हैं। तस्वीर में दोनों कलाकारों का सहज अंदाज दिखाई देता है। फिल्म यात्रा का निर्देशन गौतम घोष ने किया था। इसका प्रीमियर वर्ष 2006 में मॉन्ट्रियल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। इसके बाद यह फिल्म 4 मई 2007 को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म की कहानी कला, वास्तविकता और कल्पना के बीच के संबंधों को सामने लाती है। इसमें एक प्रसिद्ध लेखक के जीवन, उसकी रचनाओं और अतीत से जुड़े अनुभवों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। फिल्म में नाना पाटेकर ने दशरथ जोगलेकर नाम के प्रतिष्ठित लेखक की भूमिका निभाई थी।


कहानी के अनुसार, वह साहित्य का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार लेने के लिए हैदराबाद से दिल्ली की यात्रा पर निकलते हैं। इस सफर के दौरान उनके सामने अतीत की कई यादें और अनुभव उभरकर आते हैं। उनकी यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन और साहित्यिक कल्पना की पड़ताल भी करती है। दीप्ति नवल ने फिल्म में दशरथ जोगलेकर की पत्नी स्मिता का किरदार निभाया था। उनका चरित्र सौम्यता, जिम्मेदारी और पारिवारिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। वह लेखक के जीवन में एक शांत और स्थिर आधार के रूप में दिखाई देती हैं। दूसरी ओर, अभिनेत्री रेखा ने लजवंती नाम की एक तवायफ की भूमिका निभाई थी। यह किरदार दशरथ के उपन्यास की नायिका होने के साथ उनके अतीत और कल्पना से भी जुड़ा हुआ है। फिल्म में लजवंती के माध्यम से समाज की सोच, मानवीय भावनाओं और वास्तविकता को देखने के अलग-अलग नजरियों को प्रस्तुत किया गया है। कहानी आगे बढ़ने के साथ दर्शकों को लेखक के निजी अनुभवों और उसकी रचनात्मक दुनिया के बीच का अंतर समझने का अवसर मिलता है।

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