Pakistan की 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम, फिर भी एक पारसी ने कैसे तैयार की सबसे बड़ी शराब कंपनी
करांची। 1947 में जब अंग्रेजों ने भारत और पाकिस्तान में सत्ता का हस्तांतरण किया, तब कई बिजनेस के मालिकाना हक भी बदल गए। उसी में शामिल एक मर्रे ब्रेवरी भी थ। यह एशिया की सबसे पुरानी डिस्टिलरी में से एक थी। इसका मालिकाना हक तब बड़े पैमाने पर एक ब्रिटिश परिवार के पास था। लाहौर के भंडारा इसके नए मालिक बन गए। वे एक पारसी परिवार थे, जो शराब के बिजनेस में खूब फले-फूले थे। इस्फनयार भंडारा अब पाकिस्तान की सबसे बड़ी शराब बनाने वाली कंपनी चलाते हैं। हाल ही में नेपाल जाते समय वे दिल्ली में रुके थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह भारत की मेरी दसवीं यात्रा है। भंडारा बिजनेसमैन होने के साथ ही राजनेता भी हैं। उनके कोट पर पाकिस्तान के झंडे का लैपल पिन लगा था। इसके अलावा वह पूरी तरह से नीले रंग के कपड़ों में थे। पाकिस्तान की करीब 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। इसके बाद शराब बनाने वाली कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर बता रखा है कि देश के कानूनों के तहत पाकिस्तान के मुसलमानों को शराब पीने से मना किया गया है। गैर-मुसलमानों और विदेशियों को शराब पीने की अनुमति की जरुरत होती है। इसके बावजूद भी, भंडारा के लिए यह कारोबार फायदेमंद रहा है। इस्फनयार ने कहा कि निषिद्ध फल हमेशा मीठा होता है। उन्होंने कहा कि हम ऑस्ट्रेलियाई जौ से बीयर बनाते हैं। हमारे वोदका और सिंगल माल्ट भी बहुत अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। यह सब गुणवत्ता के बारे में है। हम फलों का रस भी बनाते हैं और आयात करते हैं। इसके अलावा पैक्ड वाटर बिजनेस में भी हैं। हालांकि सफलता केवल व्यापार के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रही है।
इस्फनयार पाकिस्तान नेशनल असेंबली के सदस्य भी हैं। उनके पिता 1980 के दशक में जिया-उल-हक के शासन में केंद्रीय मंत्री और परवेज मुशर्रफ के शासन में सांसद थे। लेकिन, एक समुदाय के रूप में, पारसी कमजोर पड़ गए हैं। इस्फनयार कहते हैं कि 1947 में, करीब 20,000-25,000 पाकिस्तान में रहते थे। भारत की तरह, उन्होंने राष्ट्र-निर्माण में एक प्रमुख भूमिका निभाई, खासकर कराची जैसे शहरों में। पारसी वहां, शीर्ष व्यापारियों और न्यायविदों में से थे और परोपकारी कार्यों में लगे हुए थे। 19वीं सदी में, पारसी कराची के शुरुआती क्रिकेटरों में भी शामिल थे। पारसी क्रिकेटरों की एक टीम ने 1886 में इंग्लैंड का दौरा किया था। 1952 में, जब पाकिस्तान की क्रिकेट टीम भारत के दौरे पर आई, तब बाएं हाथ के बल्लेबाज रूसी दिनशॉ टीम का हिस्सा थे, हालांकि उन्हें टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला। इस्फनयार बताते हैं कि आज हमारी संख्या 1,000 से भी कम है। अधिकतर पारसी आबादी 80 या 90 की उम्र के बीच है, कुछ हद तक जापानियों की तरह। आज पाकिस्तान में बहुत कम युवा पारसी हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग आर्थिक कारणों से चले गए, तो कुछ कानून और व्यवस्था के मुद्दों के कारण।
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