US-Iran बातचीत से जल्द मिलेगी कामयाबी, टकराव से बड़ रही मुश्किलें
जयशंकर बोले- भारत समेत कई देश तनाव कम करने में मदद करने की कोशिश कर रहे
हेलसिंकी। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका-ईरान बातचीत से जल्द ही कामयाबी मिलेगी। उन्होंने कहा कि लगातार टकराव मुश्किलें खड़ी कर रहा है और दुनिया का ज्यादातर हिस्सा निराशा है। हेलसिंकी में कुलटारेंटा वार्ता में अपनी फिनिश समकक्ष एलिना वाल्टोनन और यूएई की साहयक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह के साथ उभरती ताकतें और नए भू-राजनीतिक मुकाबले पर एक पैनल चर्चा में जयशंकर ने कहा कि भारत समेत कई देश बढ़ते संघर्ष के बीच तनाव कम करने में मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब पूछा गया कि क्या भारत सिर्फ एक तरह के फ्रस्ट्रेटेड ऑब्जर्वर की भूमिका में फंसा है या स्थिति को संभालने में मदद के लिए और कुछ कर सकता है? इस पर जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि इस समय दुनिया का ज्यादातर हिस्सा एक फ्रस्ट्रेटेड ऑब्जर्वर की स्थिति में फंसा है, लेकिन बहुत सारे देश इस स्थिति में वह करने की कोशिश कर रहे हैं जो वे कर सकते हैं। इसलिए यह कोशिश न करने की वजह से नहीं है। मैं सिर्फ हमारे बारे में बात कर रहा हूं, लेकिन मुझे लगता है कि निश्चित रूप से ऐसे बहुत सारे देश नहीं हैं जिनके सभी शामिल पार्टियों के साथ अच्छे संबंध होंगे। हमें बहुत उम्मीद है कि अमेरिका-ईरान बातचीत से जल्दी नतीजा निकलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक जयशंकर ने पश्चिम एशिया में स्थिति की जटिलता पर जोर देते हुए कहा कि भारत के इस क्षेत्र के सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स, जिनमें अमेरिका, इजराइल, ईरान और खाड़ी देश शामिल हैं के साथ मजबूत संबंध हैं।
भारत को दुनिया की उन बड़ी ताकतों में से एक बताते हुए, कहा जिनकी भूमिका बड़े वैश्विक मुद्दों पर मायने रखती है, जयशंकर से पूछा कि नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़ी स्थिति से पैदा हुई दोहरी चुनौतियों का आकलन कैसे करती है और वह उनसे कैसे निपटने की कोशिश कर रही है। इस पर जयशंकर ने कहा कि ज्यादातर देश उन युद्धों के लिए कमिटेड होते हैं जिन्हें वे लड़ते हैं और उन युद्धों के बारे में साफ नहीं होते जिन्हें वे एक आम बात मानते हैं। इसलिए मैं अपने आस-पास के कई युद्धों के बारे में सोच सकता हूं जिनके बारे में बाकी दुनिया का नजरिया काफी साफ नहीं है। इस खास मामले में चुनौती यह है। आसान शब्दों में कहें तो, आपके पास चार पार्टियां हैं, जो अमेरिका, इजराइल और ईरान हैं। मैं खाड़ी देशों को एक पार्टी के तौर पर इस्तेमाल कर रहा हूं, हालांकि मैं मानता हूं कि वे हैं; उनकी स्थिति बहुत अलग है और उन सभी के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत तेहरान के साथ अच्छे और मजबूत संबंध रखता है, जबकि उन्होंने यह भी कहा कि इस इलाके के डायनामिक्स में शामिल चार खास लोगों के साथ नई दिल्ली के संबंध नेचर या स्कोप में एक जैसे नहीं हैं।
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