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  • Saturday, 11 April 2026
Trump की दो टूक चेतावनी: युद्धविराम हो या न हो, हर हाल में खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य

Trump की दो टूक चेतावनी: युद्धविराम हो या न हो, हर हाल में खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य

वॉशिंगटन। इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ता से ठीक पहले नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ किसी समझौते पर सहमति बने या न बने, सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को हर कीमत पर खुलवाया जाएगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था होर्मुज के बंद होने से बुरी तरह प्रभावित है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से संचालित होता है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी संदेश में कहा कि उनकी सैन्य कार्रवाई ने अपने उद्देश्यों को पूरा कर लिया है और अब उनका अगला लक्ष्य इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को बहाल करना है। ईरान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना, वायुसेना और उनके बड़े नेता अब पस्त हो चुके हैं, ऐसे में उनके पास अब कुछ नहीं बचा है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि ईरानी आज सिर्फ इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि बातचीत की मेज सजी है, वरना उन्हें यह समझना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को बाधित कर वे दुनिया को ज्यादा समय तक ब्लैकमेल नहीं कर सकते। शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को आगाह किया। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी प्रतिनिधिमंडल सद्भावना के साथ चर्चा के लिए तैयार है, तो अमेरिका उनका स्वागत करता है।

लेकिन यदि उन्होंने कोई खेल खेलने या अमेरिका को गुमराह करने की कोशिश की, तो इसका परिणाम उनके लिए बहुत बुरा होगा। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस वार्ता में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बकर कलीबाफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची और रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान सहित एक उच्च स्तरीय दल के शामिल होने की चर्चा है। हालांकि, ईरान ने बातचीत शुरू करने से पहले अपनी शर्तें सामने रखी हैं। ईरानी संसद अध्यक्ष कलीबाफ ने जोर देकर कहा है कि किसी भी सार्थक संवाद से पहले लेबनान में संघर्ष-विराम होना अनिवार्य है। इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी लेबनान के साथ जल्द से जल्द बातचीत की इच्छा जताई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं कि क्या यह वार्ता खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाएगी या ट्रंप की चेतावनी के बाद तनाव और बढ़ेगा।

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