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कुर्सी गई फितरत वही! Justin Trudeau ने अपने ही सांसद को दी भारत से दोस्ती की सजा

कुर्सी गई फितरत वही! Justin Trudeau ने अपने ही सांसद को दी भारत से दोस्ती की सजा

ओटावा। कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो की कुर्सी चली गई लेकिन फितरत वही की वही है। भारत से वह तो बेहतर संबंध नहीं रख पाए, मगर कनाडा में जिसने ऐसा किया, उसके पर कतरने में लगे हैं। जी हां, भारत से बेहतर संबंध रखने वाले भारतीय मूल के एक सांसद का जस्टिन ट्रूडो की पार्टी ने टिकट काट दिया है। कनाडा की लिबरल पार्टी ने भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य को पार्टी लीडरशिप के लिए चुनाव लड़ने और उनके ओटावा नेपियन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ने के लिए नॉमिनेशन देने से रोक दिया है। ट्रूडो की पार्टी का यह फैसला इसलिए भी हैरानी भरा है, क्योंकि सांसद चंद्र आर्य का भारत से कनेक्शन है। वह भारतीय मूल के हैं। वह भारत से बेहतर संबंध रखने की वकालत करते रहे हैं। जब भारत और कनाडा के रिश्तों में तल्खी है, तब भी वह भारत से बेहतर संबंध की बात करते रहे हैं। कनाडाई सांसद ने एक्स पर मोदी के साथ अपनी तस्वीरें भी शेयर की थीं। चंद्र आर्य का जुड़ाव भारत के कर्नाटक से है। उनका जन्म कर्नाटक के तुमकुर जिले के द्वारलू गांव में हुआ। उन्होंने धारवाड़ के कर्नाटक विश्वविद्यालय से एमबीए किया। 2006 में कनाडा जाने के बाद उन्होंने पहले इंडो-कनाडा ओटावा बिजनेस चैंबर के अध्यक्ष के रूप में काम किया और बाद में 2015 के कनाडाई संघीय चुनाव में नेपियन राइडिंग से सांसद बने। उन्हें 2019 और 2021 में भी दोबारा चुना गया। वह कनाडा में हिंदुओं के प्रमुख आवाज हैं।

साथ ही खालिस्तानियों को खटकते हैं। कारण की वह लगातार खालिस्तान के खिलाफ आवाज उठाते हैं। ट्रूडो की पार्टी सांसद चंद्र आर्य पर भारत सरकार से संबंध होने के आरोप लगाती रही है।पिछले साल भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात का भी जिक्र किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद चंद्र आर्य ने कनाडा और भारत के बीच तल्ख रिश्तों के बावजूद भारत यात्रा की जानकारी कनाडा सरकार को नहीं दी थी। रिपोर्ट में गोपनीय मंजूरी रखने वाले सूत्रों का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा सरकार और लिबरल पार्टी, दोनों ने ही आर्य को लीडरशिप की रेस और दोबारा चुनाव लड़ने से रोकने की कोई खास वजह नहीं बताई है। सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि कनाडा की खुफिया एजेंसी ने सरकार को सांसद आर्य के भारत सरकार से कथित तौर पर करीबी रिश्तों की जानकारी दी थी। इन रिश्तों में ओटावा में भारतीय उच्चायोग भी शामिल है। सुरक्षा मंजूरी रखने वाले पार्टी अधिकारियों ने भी विदेशी हस्तक्षेप पर एक सामान्य ब्रीफिंग मिलने के बाद आर्य को लेकर चिंता जताई थी। इन चिंताओं के बावजूद सांसद चंद्र आर्य को लीडरशिप और नेपियन नॉमिनेशन से हटाने का फैसला पूरी तरह से लिबरल पार्टी ने लिया था।

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