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  • Tuesday, 03 November 2026
भारत-रूस के खिलाफ Pakistan की साजिश को तालिबान ने किया नाकाम, गुप्त बैठक में सभी मांगें ठुकराकर दिया करारा जवाब

भारत-रूस के खिलाफ Pakistan की साजिश को तालिबान ने किया नाकाम, गुप्त बैठक में सभी मांगें ठुकराकर दिया करारा जवाब

कंधार। अफगानिस्तान के कंधार में हाल ही में संपन्न हुई एक गुप्त बैठक के दौरान पाकिस्तान की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जिसे तालिबान ने पूरी तरह से विफल कर दिया। गत 22 अक्टूबर को जनरल इनायत हुसैन के नेतृत्व में पाकिस्तान का एक उच्चस्तरीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल कंधार पहुंचा था। इस प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा क्षेत्र के चार शीर्ष अधिकारी और विदेश मंत्रालय का एक प्रतिनिधि शामिल था। बैठक में पाकिस्तान ने भारत और रूस के खिलाफ कई प्रस्ताव रखे और तालिबान के सामने पांच प्रमुख मांगें पेश कीं, जिनमें जलालाबाद में भारतीय कांसुलेट को बंद करना और अफगानिस्तान के रास्ते रूस की लॉजिस्टिक सहायता को ईरान तक पहुंचने से रोकना भी शामिल था। हालांकि, तालिबान के शीर्ष नेतृत्व ने पाकिस्तान की इन सभी मांगों को सिरे से खारिज कर दिया।


पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल अधिकारियों की यह गुप्त बैठक कंधार के गवर्नर मुल्ला शिरीन, प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद, उप गृह मंत्री सद्र इब्राहिम, रक्षा मंत्रालय के मुख्य निरीक्षक मुफ्ती लुत्फुल्लाह हकीमी और सैन्य खुफिया प्रमुख मुल्ला अब्दुल कादूस जैसे तालिबान के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं के साथ हुई थी। बैठक के दौरान पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के नेताओं को सौंपने, अफगान लड़ाकों की पाकिस्तान में एंट्री रोकने, पाकिस्तान में तालिबान की संपत्ति बेचने, जलालाबाद स्थित भारतीय कांसुलेट को बंद करने तथा रूसी लॉजिस्टिक सप्लाई को बाधित करने की मांग उठाई। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती राजनयिक मौजूदगी से असहज रहा है और वह लगातार भारतीय कांसुलेट को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती बताता आया है।


लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान के इस दबाव के आगे झुकने से साफ इंकार कर दिया। भारतीय कांसुलेट को बंद करने की मांग पर पलटवार करते हुए तालिबान ने पाकिस्तान के सामने एक कड़ी शर्त रख दी और कहा कि यदि जलालाबाद में भारतीय कांसुलेट बंद किया जाता है, तो उसी स्थान पर मौजूद पाकिस्तानी कांसुलेट को भी तुरंत बंद करना होगा। इस कड़े रुख से तालिबान ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि वह भारत के राजनयिक हितों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा। इसके अलावा, रूस की लॉजिस्टिक सहायता को रोकने के प्रस्ताव को भी तालिबान ने पूरी तरह से ठुकरा दिया।


दूसरी ओर, टीटीपी के नेताओं को सौंपने की पुरानी पाकिस्तानी मांग पर तालिबान ने आंशिक रुख तो दिखाया, लेकिन उसके बदले में पाकिस्तान के सामने अपनी ही एक बड़ी शर्त रख दी। तालिबान ने पाकिस्तान को कुछ पुख्ता दस्तावेज और सबूत सौंपे, जिनमें पाकिस्तानी धरती पर सक्रिय तालिबान विरोधी संगठनों के कार्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों का कच्चा-चिट्ठा मौजूद था। तालिबान ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि पाकिस्तान उनकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपनी जमीन पर चल रहे उन आतंकी ठिकानों और कार्यालयों को बंद करना होगा जो तालिबान के विरोध में काम कर रहे हैं। इस प्रकार, क्षेत्रीय कूटनीति और अपनी रणनीतिक चालों के तहत पाकिस्तान द्वारा बुना गया यह पूरा जाल तालिबान के सख्त और दो टूक रवैये के कारण पूरी तरह नाकाम साबित हुआ, जिससे इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़ा झटका लगा है।

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