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Study: युद्ध इंसान ही नहीं पर्यावरण और जलवायु पर भी डाल रहे बहुत बड़ा बोझ

Study: युद्ध इंसान ही नहीं पर्यावरण और जलवायु पर भी डाल रहे बहुत बड़ा बोझ

इजराइल-गाजा संघर्ष से 33.2 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ

लंदन। दुनिया युद्धों को मानवीय दुख, मौत और आर्थिक नुकसान के रूप में देखती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक नई स्टडी में दिखाया है कि युद्ध पर्यावरण और जलवायु पर भी बहुत बड़ा बोझ डाल रहे हैं। एक स्टडी के मुताबिक इजराइल-गाजा संघर्ष से अब तक करीब 33.2 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ है। यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। जलवायु संकट को और तेज कर रहा है। यह दुनिया भर में 76 लाख पेट्रोल कारों के एक साल में निकलने वाले धुएं के समान है। इतनी कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने के लिए 3.31 करोड़ एकड़ जंगलों को पूरे एक साल तक काम करना पड़ेगा। ये तुलनाएं दिखाती हैं कि एक युद्ध कितना बड़ा पर्यावरणीय नुकसान कर सकता है। स्टडी में बताया कि युद्ध गतिविधियां... बमबारी, मिसाइल हमले, टैंक और सैन्य वाहनों का इस्तेमाल, लड़ाकू विमानों की उड़ानें। इनसे ही 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड निकला है. पूर्व-युद्ध तैयारियां...जैसे इजराइल की दीवारें और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर। युद्ध के बाद पुनर्निर्माण...गाजा में तबाह इमारतें, सड़कें, अस्पताल, स्कूल और बिजली व्यवस्था को दोबारा बनाना। इसमें सीमेंट, स्टील और अन्य सामग्री का इस्तेमाल होता है, जो बहुत कार्बन छोड़ती है। अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों में सैन्य गतिविधियों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह शामिल नहीं किया जाता। कई देश अपनी रिपोर्ट में सेना के उत्सर्जन को अलग रखते हैं। इसलिए असली प्रभाव छिपा रह जाता है।

अब समय आ गया है कि जलवायु नीतियों में सैन्य उत्सर्जन को भी जोड़ा जाए। दुनिया पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रही है। ऐसे में लंबे युद्ध वैश्विक तापमान वृद्धि को और तेज कर देते हैं। युद्ध न सिर्फ लोगों की जान लेते हैं, बल्कि पृथ्वी की सेहत भी बिगाड़ते हैं। स्टडी में बातया गया है कि युद्ध का नुकसान सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। यह पूरी धरती के लिए खतरा है। शोधकर्ता कहते हैं कि युद्ध से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को अब गंभीरता से मापना और रिपोर्ट करना जरूरी है। अगर हम जलवायु संकट रोकना चाहते हैं, तो युद्धों को कम करना और शांति बनाए रखना सबसे बड़ा कदम होगा। युद्ध न सिर्फ मानवता के खिलाफ है, बल्कि पर्यावरण के खिलाफ भी है।

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