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Imran Khan की लोकप्रियता और स्वतंत्र सोच से डरती है पाकिस्तान सरकार

Imran Khan की लोकप्रियता और स्वतंत्र सोच से डरती है पाकिस्तान सरकार

  • अकरम बोले-पूर्व पीएम और बुशरा बीबी के साथ किया जा रहा अमानवीय व्यवहार

इस्लामाबाद। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने पूर्व पीएम इमरान खान की हिरासत की निंदा की है, जिसे अब 1,000 दिन पूरे हो चुके हैं। पार्टी ने इसे साफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि इसका कोई संवैधानिक या कानूनी आधार नहीं है, साथ ही इमरान खान की तुरंत रिहाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई के केंद्रीय सूचना सचिव वकास अकरम ने बयान में कहा कि इमरान खान को राजनीतिक बदले का निशाना बनाया जा रहा है। मौजूदा सरकार उनकी लोकप्रियता और स्वतंत्र सोच से डरती है, इसलिए उन्हें साइडलाइन करने की कोशिश की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अकरम ने कहा कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इमरान खान को एकांत कारावास में रखा गया है और उनके परिवार, वकीलों और पार्टी नेतृत्व को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा, जो कि बुनियादी मानव और कानूनी अधिकारों का साफ उल्लंघन है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले इस्लामाबाद हाईकोर्ट में इमरान खान और बुशरा बीबी के 190 मिलियन पाउंड वाले केस में अपील और सजा निलंबन की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एकांत कारावास और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं उठाईं, जिसके बाद अदालत ने जल्द सुनवाई का संकेत दिया। इससे पहले मार्च में इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपने पिता की हिरासत को ‘मनमाना’ बताया था और पाकिस्तान सरकार से उनके साथ हो रहे व्यवहार को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा था कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का उल्लंघन है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान कासिम खान ने कहा कि इमरान खान का मामला कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि 2022 के बाद पाकिस्तान में दमन की एक बड़ी लहर का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने जीएसपी-प्लस ढांचे के तहत कई मानवाधिकार समझौतों का पालन करने का वादा किया है, जिनमें नागरिक और राजनीतिक अधिकारों का अंतरराष्ट्रीय समझौता और यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन शामिल हैं। कासिम ने कहा कि मैं और मेरा भाई कोई राजनीतिक लोग नहीं हैं। हम कभी भी ऐसे मंचों पर आना नहीं चाहते थे, लेकिन मेरे पिता की हालत ने हमें मजबूर कर दिया है। हम चुप नहीं रह सकते जब उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें हमसे दूर रखा जा रहा है। अगर हालात अलग होते, तो हमें पता है कि वह हमें आजाद कराने के लिए हर संभव कोशिश करते। हम उनके लिए इतना तो कर ही सकते हैं।

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