अमेरिकी नेवी के तीसरे जहाज में लगी आग, फिर भी ईरान के खिलाफ तैयारी में जुटे Trump
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच एक नई रहस्यमयी घटना ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका का अत्यंत शक्तिशाली और आधुनिक गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, यूएसएस हिगिंस अचानक आग की चपेट में आ गया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात यह युद्धपोत एशियाई समुद्री सीमा में मौजूद था, जब इस पर यह हादसा हुआ। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अभी तक आग लगने के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं किया है। रक्षा सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस आग से युद्धपोत के विद्युत प्रणाली (इलेक्ट्रिकल सिस्टम) और इंजन रूम को गंभीर क्षति पहुंची है। नुकसान का सटीक आकलन और मरम्मत में लगने वाले समय पर फिलहाल पेंटागन ने चुप्पी साध रखी है। इस रहस्यमयी खामोशी ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साजिश के दावों को हवा दे दी है। कई लोग इस घटना को चीन की सक्रियता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट की जंग का असर अब गुप्त रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच चुका है। शक इसलिए भी गहरा रहा है क्योंकि हाल ही में अमेरिका के दो अन्य प्रमुख युद्धपोतों, यूएसएस ड्वाइट डी आइजनहावर और यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड में भी आग लगने की खबरें सामने आई थीं।
एक तरफ जहां समंदर में अमेरिकी बेड़े मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के हालात और भी विस्फोटक हो गए हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने अपने नागरिकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए ईरान, लेबनान और इराक की यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वहां के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को तत्काल इन देशों से वापस लौटने को कहा है। इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने नाटो सहयोगियों के बीच दरार पैदा कर दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे स्पेन और इटली में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कटौती कर सकते हैं। उन्होंने यूरोपीय देशों पर ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने जर्मन चांसलर की कार्यशैली पर भी कड़ा हमला बोला है। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि यह टकराव अब केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका और उसके पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों के बीच एक बड़े कूटनीतिक संकट में बदल रहा है।
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