Newton की वर्ष 2060 को लेकर की गई भविष्यवाणी फिर चर्चा में
वाशिंगटन। महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन की वर्ष 2060 को लेकर की गई भविष्यवाणी फिर चर्चा का विषय बन गई है। मशहूर वैज्ञानिक न्यूटन ने लगभग 322 वर्ष पहले अपनी निजी टिप्पणियों में ऐसी गणनाएं दर्ज की थीं, जिनकी व्याख्या आज दुनिया के संभावित अंत से जोड़कर की जा रही है। चूंकि वर्ष 2060 अब अधिक दूर नहीं है, इसलिए सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस भविष्यवाणी को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूटन की बातों को शाब्दिक रूप से लेने के बजाय उनके धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों में समझना अधिक उचित होगा। वर्ष 1704 में लिखी गई अपनी नोटबुक्स में न्यूटन ने बाइबिल और अन्य धार्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के आधार पर समय की गणना प्रस्तुत की थी। उन्होंने बाइबिल में वर्णित ‘टाइम, टाइम्स एंड हाफ ए टाइम’ जैसी अवधारणाओं का गणितीय विश्लेषण करते हुए 1260 दिनों को 1260 वर्षों के बराबर माना। न्यूटन के अनुसार यदि इस अवधि की शुरुआत वर्ष 800 ईस्वी से मानी जाए तो इसका समापन वर्ष 2060 में होगा। उन्होंने यह भी लिखा था कि यह घटना इससे बाद में हो सकती है, लेकिन इससे पहले होने का कोई स्पष्ट आधार उन्हें दिखाई नहीं देता।
न्यूटन का मानना था कि इस अवधि के बाद ईसा मसीह का पुनरागमन होगा और पृथ्वी पर लगभग एक हजार वर्षों तक शांति एवं न्याय पर आधारित ईश्वर का राज्य स्थापित होगा। उनकी व्याख्या के अनुसार यहूदियों का इसराइल में एक समृद्ध राज्य होगा और मानव समाज एक नए युग में प्रवेश करेगा। कई शोधकर्ताओं का कहना है कि न्यूटन ने इस भविष्यवाणी को किसी प्राकृतिक प्रलय या ग्रह के विनाश के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े आध्यात्मिक और धार्मिक परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा था। न्यूटन के जीवन का धार्मिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण था जितना उनका वैज्ञानिक योगदान। उन्होंने बाइबिल, इतिहास और धर्मशास्त्र पर सैकड़ों पृष्ठ लिखे थे। उनका विश्वास था कि ब्रह्मांड ईश्वर की रचना है और इसके नियमों को विज्ञान तथा गणित के माध्यम से समझा जा सकता है। इसी सोच के आधार पर उन्होंने धार्मिक ग्रंथों में वर्णित समय-गणना का विश्लेषण कर अपनी व्याख्या तैयार की थी।
विशेषज्ञ स्टीफन डी. स्नोबेलन के अनुसार अधिकांश लोग न्यूटन को केवल वैज्ञानिक के रूप में जानते हैं, जबकि उनका धार्मिक अध्ययन भी अत्यंत व्यापक था। उनका कहना है कि न्यूटन की भविष्यवाणी को सीधे दुनिया के विनाश की घोषणा मानना उचित नहीं है, क्योंकि वे संभवतः पुराने युग के अंत और एक नई व्यवस्था की शुरुआत का संकेत दे रहे थे। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक संघर्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव और नई महामारियों जैसी चुनौतियों ने भविष्य को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे माहौल में न्यूटन की वर्ष 2060 संबंधी भविष्यवाणी फिर सुर्खियों में आ गई है।
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