Last Man in Tower की कहानी आज की महिलाओं की हकीकत
मुंबई। अपकमिंग फिल्म लास्ट मैन इन टावर में बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या दत्ता संगीता नामक एक ऐसे किरदार को जीवंत करती नजर आएंगी, जिसकी कहानी आज के समाज में कई महिलाओं की हकीकत को दर्शाती है। दिव्या ने इस किरदार के बारे में बात करते हुए कहा कि संगीता कोई असाधारण महिला नहीं, बल्कि हमारे आसपास मौजूद उन अनगिनत महिलाओं में से एक है, जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इतना उलझ जाती हैं कि अक्सर अपनी खुशियों और जरूरतों को ही पीछे छोड़ देती हैं। संगीता ऊपर से तो एक सामान्य जीवन जीती हुई प्रतीत होती है, लेकिन अंदर ही अंदर वह कई तरह की परेशानियों, जिम्मेदारियों और भावनात्मक उलझनों के जाल में फंसी हुई है। यह किरदार दर्शकों को अपनी सी लगने वाली जटिलताओं से जोड़ेगा। बातचीत में दिव्या दत्ता ने अपने किरदार की गहराई पर प्रकाश डालते हुए बताया, संगीता की जिंदगी पर घर की परिस्थितियों का काफी गहरा असर पड़ा है। उसके बच्चे को विशेष देखभाल की आवश्यकता है, और पति के साथ भी उसकी बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव काफी कम हो गया है। इन सबके बीच, वह खुद भी अपनी जिंदगी और अपने व्यक्तित्व से धीरे-धीरे दूर होती चली गई है। वह अपनी जिंदगी को थोड़ा आसान और बेहतर बनाने की कोशिश करती है, लेकिन एक के बाद एक कई जिम्मेदारियां और परेशानियां उसकी इन कोशिशों में पानी फेर देती हैं।”
दिव्या ने आगे कहा, घर के हालात, बच्चे की विशेष जरूरतें और पति के साथ बढ़ती दूरी जैसी चीजों ने उसकी जिंदगी को इस कदर घेर लिया है कि शायद उसे खुद भी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि वह कब अपने आपको नजरअंदाज करने लगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक महिला के लिए ये छोटी-छोटी चीजें काफी मायने रखती हैं कि वह कैसे रहती है, खुद को कैसे देखती है, अपनी खुशियों के लिए कितना समय निकालती है… ये सब उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा होता है। हालांकि, जब रोजमर्रा की जिम्मेदारियां इतनी हावी हो जाती हैं, तो इंसान धीरे-धीरे उसी जिंदगी को अपनी आदत मान लेता है। संगीता के साथ भी कुछ ऐसा ही है – वह परेशान है, गुस्सा करती है, कमजोर महसूस करती है, लेकिन अपनी इन भावनाओं को खुलकर कहने का उसके पास कोई जरिया नहीं है। वह अंदर ही अंदर अपने आप से रोजाना एक अदृश्य लड़ाई लड़ती है।
दिव्या ने यह भी बताया, संगीता के किरदार में एक उम्मीद भी छिपी है। वह एक बेहतर भविष्य की उम्मीद करती है और शायद यही उम्मीद उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। हालांकि, एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या संगीता खुद जानती है कि आखिर उसकी वास्तविक खुशी किस चीज में है? यही बात इस किरदार को और अधिक दिलचस्प और बहुआयामी बनाती है। संगीता के व्यक्तित्व में कई अलग-अलग रंग हैं और वह एक ईमानदार महिला है, जो अपनी परिस्थितियों से जूझ रही है। दिव्या दत्ता ने दर्शकों के संगीता से जुड़ने की संभावना पर बात करते हुए कहा, फिल्म में संगीता को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग हो सकती है। कोई उसके साथ खड़ा नजर आ सकता है तो कोई उसके फैसलों से नाराज भी हो सकता ।
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