Nepal जलप्रलय: मलबे में दबा देवीघाट तो 80 फीसद कस्बा हो गया तबाह
- हजारों लोगों की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल रही, घर, दुकान, सड़क और रोजी-रोटी सब बाढ़ में बहे
काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का मंजर अब भी कायम है। नुवाकोट जिले के त्रिशूली और ताड़ी नदी के संगम पर बसे देवीघाट में बाढ़ ने ऐसा कहर बरपाया कि करीब 80 फीसदी कस्बा मलबे में दब गया। 30 अगस्त की सुबह राहत और नुकसान का जायजा लेने पहुंचे लोगों को हर तरफ मलबे में अपना सामान और अपनों को तलाशते देखा गया। इसी बीच अचानक बाढ़ का अलर्ट जारी हुआ तो लोगों में फिर अफरा-तफरी मच गई और जान बचाने के लिए उन्हें दोबारा सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अलर्ट के कुछ ही मिनटों में पूरा कस्बा खाली हो गया। लोग घरों से निकलकर ऊंचे स्थानों की ओर भागे और कई लोग एक पेड़ के नीचे जमा हो गए। देवीघाट की करीब 20 हजार की आबादी में बड़ी संख्या में मकान, दुकानें और अन्य तमाम तरह की सुविधाएं बाढ़ में बह गईं। इस तबाही को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि देवीघाट में पहले भी बाढ़ आ चुकी है, लेकिन इस बार के जैसी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई। बाढ़ को करीब से देखने वाले लोगों को शुरु में लगा, कि पानी कुछ बढ़ेगा और फिर हालात सामान्य हो जाएंगे। इसी उम्मीद पर अनेक लोग तो अपने घरों पर ही बने रहे, लेकिन अनुमान से इतर बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया। खेती-किसानी से जुड़े लोगों का दर्द है कि घरों के साथ खेत भी बर्बाद हो गए हैं। उनका कहना, कि अब सबसे बड़ी चुनौती इलाके को दोबारा बसाने की है। घरों, दुकानों, सड़कों, पुलिस सेंटर और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नए सिरे से खड़ा करना होगा। मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों को आशंका है कि इसमें कई साल लग सकते हैं।
इससे पहले देवीघाट में जब बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा तो लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया था। लोगों ने बताया कि आसपास के त्रिशूली बाजार और बेत्रावती बाजार भी बाढ़ की चपेट में आ गए। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बिगड़े कि लोगों को सोचने तक का समय तक नहीं मिला। श्रद्धा ने बताया कि करीब 10 मिनट के भीतर वे घर छोड़कर नौडांडा की ओर भाग गए। कुछ लोग समय रहते सुरक्षित निकल गए, लेकिन कई ऐसे भी हैं जिनके बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनकी बस्ती के करीब 7 हजार लोगों की स्थिति की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।
मलबे के बीच पुनर्वास की चुनौती
देवीघाट में बाढ़ का पानी कम होने के बाद असली चुनौती अब पुनर्वास की है। हजारों लोगों के सामने सुरक्षित आवास, भोजन, रोजगार और बच्चों की शिक्षा की समस्या खड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में सामान्य जनजीवन बहाल करने के लिए सिर्फ मलबा हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सड़कों, घरों, बाजारों और सार्वजनिक सुविधाओं को भी दोबारा तैयार करना पड़ेगा। 26 अगस्त की बाढ़ ने भोटेकोशी-त्रिशूली नदी कॉरिडोर में व्यापक तबाही मचाई थी, जिसका असर देवीघाट तक पहुंचा। अब स्थानीय लोग राहत के साथ-साथ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी आपदा के बाद उनका कस्बा कब और कैसे दोबारा खड़ा होगा।
Tags
Comment / Reply From
You May Also Like
Popular Posts
Newsletter
Subscribe to our mailing list to get the new updates!