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महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात जरूरी: Saba Azad

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात जरूरी: Saba Azad

मुंबई। जल्द ही अभिनेत्री सबा आजाद कॉमेडी-ड्रामा सीरीज हूज योर गायनिक सीजन 2 में नजर आएगी। अपकमिंग सीजन को लेकर अभिनेत्री का कहना है कि शो का मुख्य उद्देश्य उन विषयों पर खुलकर चर्चा करना है, जिन्हें समाज में अक्सर बंद कमरों तक सीमित कर दिया जाता है। इस सीरीज में वह ‘डॉ. विदुषी कोठारी’ का किरदार निभा रही हैं। चर्चा के दौरान सबा आजाद ने कहा कि पहले सीजन में सेक्स एजुकेशन और महिलाओं के स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया था। उनके मुताबिक दूसरा सीजन भी उसी सोच और उद्देश्य को आगे बढ़ाएगा। अभिनेत्री का मानना है कि समाज में इन विषयों पर खुली चर्चा होना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों के बीच जागरूकता बढ़ सके और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सामान्य नजरिए से देखा जा सके। जब सबा से पूछा गया कि क्या आज भी समाज के लिए एक स्वतंत्र और महत्वाकांक्षी महिला को स्वीकार करना कठिन है, तो उन्होंने साफ कहा कि बड़े शहरों में रहने के बावजूद जमीनी स्तर पर समाज अब भी काफी हद तक पितृसत्तात्मक सोच से प्रभावित है। अभिनेत्री ने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर सम्मान पाने के लिए आज भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है और उनके फैसलों को लेकर समाज बहुत जल्दी राय बना लेता है।

सबा आजाद के अनुसार सामाजिक व्यवस्था लंबे समय से पुरुषों की सफलता को केंद्र में रखकर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं को अपनी पसंद से काम करने या जीवन के फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता नहीं मिल पाती। अभिनेत्री का मानना है कि शहरों में रहने वाले लोगों को यह वास्तविकता हमेशा नजर नहीं आती, लेकिन यह सच्चाई आज भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पेशेवर जीवन और निजी जिंदगी दोनों जगह लगातार खुद को साबित करना पड़ता है। अगर कोई महिला काम करती है, तो उसके फैसलों पर सवाल उठाए जाते हैं और अगर वह काम नहीं करती, तब भी समाज उसे जज करने से पीछे नहीं हटता। सबा का कहना है कि यही दोहरा रवैया महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि कई लड़कों की परवरिश ऐसे माहौल में होती है, जहां उन्हें यह महसूस कराया जाता है कि वे महिलाओं से बेहतर हैं। ऐसे में जब उनका सामना किसी आत्मनिर्भर और मजबूत सोच वाली महिला से होता है, तो उनके अहंकार को ठेस पहुंचती है। सबा के मुताबिक कई पुरुष महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के आदी नहीं होते, जिसकी वजह से रिश्तों में तनाव और असहजता पैदा होने लगती है।

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