जंग में अमेरिकी ठिकानों को Iran ने बनाया निशाना, ट्रंप को अरबों डॉलर का नुकसान
एक रिपोर्ट में किया दावा- चीनी सैटेलाइट ने दी ईरान को सटीक लोकेशन जानकारी
वाशिंगटन। कुछ दिन पहले जब ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले कर तबाह किए और अमेरिका के सैन्य ठिकानों को कई जगह निशाना बनाया था। उस वक्त पूरी दुनिया हैरान रह गई थी और सवाल उठा कि आखिर ईरान के पास इतनी सटीक लोकेशन कहां से आई? अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कुछ साल पहले चीन से एक सेटेलाइट खरीदा था। मीडिया रिपोर्ट में ऐसा छापा गया है कि ईरान ने 2024 के आखिर में चीन से गुपचुप तरीके से एक स्पाई सेटेलाइट खरीदी था जिसका नाम टीई01 है। इसे बनाया और लॉन्च किया चीन की एक कंपनी अर्थ आई ने। कागजों पर तो यह कमर्शियल डील दिखती है, लेकिन इसके पीछे का सच कुछ और है। लीक हुए कुछ दस्तावेजों के मुताबिक इस सेटेलाइट का कंट्रोल ईरान की सिविलियन स्पेस एजेंसी के पास नहीं बल्कि सीधे आईआरजीसी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के पास था। इस खबर के बाहर आते ही चर्चा शुरू हो गई। आखिरकार ईरान ने जो हमले किए अब उसके पीछे चीनी सेटेलाइट्स का हाथ बताया जा रहा है। दरअसल इसका असर कुछ ऐसे हुआ कि मार्च 2026 के महीने में जब ईरान ने अमेरिका के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला किया तो उसके ठीक 24 घंटे पहले ही सटीक तस्वीरें इसी सेटेलाइट ने ईरान को भेजी थीं। हमला खत्म होने के बाद नुकसान कितना हुआ इसकी जानकारी भी इसी सेटेलाइट ने दी यानी चीनी तकनीक ईरान के लिए आंख और कान का काम कर रही थी तो कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका पर जो हमले ईरान ने किए उसमें कहीं ना कहीं चीनी सेटेलाइट का भी एक बड़ा रोल था। अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि इस हमले में अमेरिका को नुकसान कितना हुआ। क्योंकि अमेरिका ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि इस जंग में उनके फाइटर जेट्स को नुकसान पहुंचा है, लेकिन सूची बहुत लंबी है।
इस जंग में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ और कहीं ना कहीं इसके पीछे इस चीनी सेटेलाइट का भी एक बड़ा रोल रहा है। इस जंग में ईरान को तो नुकसान हुआ ही लेकिन अमेरिका ने उम्मीद नहीं की होगी कि उसे इतना भारी नुकसान होगा। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले अमेरिका का एफ-15 ई स्ट्राइक ईगल गिराया गया। ए10 थंडरब्ट टू गिराया गया। एमक्यू9 रिपर ड्रोन कम से कम 20 से 24 ड्रोन्स गिराए गए। इसके अलावा चीनूक हेलीकॉप्टर यहां तक कि ब्लैक हॉक के डैमेज होने की भी रिपोर्ट्स थी। ईरान ने तो यहां तक दावा किया था कि उसने एक अमेरिकी एफ-35 तक गिरा दिया है और इसके साथ ही साथ कई सैन्य ठिकानों पर भी ईरान ने हमला किया। हालांकि इस नुकसान की पुष्टि भारत नहीं करता है। आमतौर पर जंग में दोनों तरफ से नुकसान पहुंचता है। ईरान को भी नुकसान हुआ, अमेरिका को नुकसान हुआ, लेकिन अमेरिका को जो नुकसान हुआ वह इसलिए चर्चा में आया क्योंकि अमेरिका ने जिस तरह से बयानबाजी की थी और हमले की तैयारी की थी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि ईरान अमेरिका को इतना भारी भरकम नुकसान पहुंचा पाएगा और अब जब ये रिपोर्ट सामने आई है तो चीनी सेटेलाइट को भी इसके पीछे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस सेटेलाइट ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस की 13, 14 और 15 मार्च की तस्वीरें ली थी। 14 मार्च को ट्रंप ने खुद माना था कि इस बेस पर मौजूद अमेरिकी विमानों को नुकसान हुआ था। इसके अलावा इस सेटेलाइट ने जॉर्डन के मुआफक साल्टी एयरबेस पर भी नजर रखी। साथ ही बहरीन में अमेरिकी नौसेना के यूएस फिफ्थ फ्लट के बेस और इराक के एरेबल एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों को भी मॉनिटर किया गया। यही नहीं कुवैत, जिबूती, ओमान और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के कोऑर्डिनेट्स की पूरी सूची इस चीनी सेटेलाइट के पास थी। ये अमेरिका की इंटेलिजेंस के लिए बहुत बड़ा फेलियर माना जा रहा है। रिपोर्ट्स कहती है कि ईरान ने इस सेटेलाइट की मदद से अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर नजर रखा और उसी हिसाब से हमलों की तैयारी की। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
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