भारत में अपने ही कलाकारों को सबसे ज्यादा करते है ट्रोल: Ameesha Patel
मुंबई। सामाजिक और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल ने सोशल मीडिया पर बढ़ते ट्रोलिंग कल्चर और फर्जी पीआर गेम को निशाने पर लिया है। उन्होंने भारतीय मानसिकता को “दुखद” और “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि भारत में कलाकारों को सबसे ज्यादा ट्रोल उनके अपने ही लोग करते हैं, जबकि हॉलीवुड सितारों को उनके देश में इतना विरोध नहीं झेलना पड़ता। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमीषा पटेल ने कहा कि आजकल लोगों की मानसिकता दूसरों को नीचे गिराने और नकारात्मकता फैलाने वाली हो गई है। उन्होंने बड़े कार्यक्रमों और इवेंट्स में सितारों के कपड़ों, लुक और स्टाइल को लेकर होने वाली आलोचनाओं पर नाराजगी जताई। अमीषा के मुताबिक, यह सिर्फ दुखद ही नहीं बल्कि बेहद शर्मनाक भी है कि भारतीय दर्शक अपने ही कलाकारों के प्रति इतनी कठोर सोच रखते हैं। उन्होंने लिखा कि भारत में एक्टर्स को अपने ही देश में हॉलीवुड सितारों की तुलना में कहीं ज्यादा ट्रोल किया जाता है।
अभिनेत्री ने सिर्फ ट्रोलिंग कल्चर ही नहीं बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते पीआर गेम पर भी खुलकर हमला बोला। हाल ही में मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि आजकल कई कलाकार खुद को नंबर वन स्टार साबित करने में लगे हैं, चाहे उन्होंने कोई बड़ी उपलब्धि हासिल की हो या नहीं। अमीषा ने कहा कि कुछ युवा कलाकार अपनी पीआर टीमों के जरिए खुद को सुपरस्टार बताने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि असली पहचान दर्शकों के प्यार और फिल्मों की सफलता से मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिन कलाकारों ने अभी तक 200 करोड़ क्लब की कोई फिल्म नहीं दी, वे भी खुद को नंबर वन बताने में लगे हैं। अमीषा ने कहा कि किसी कलाकार को तभी सुपरस्टार कहा जाना चाहिए जब उसने ऐसा काम किया हो जो इतिहास बना दे। उन्होंने फर्जी प्रचार और पीआर के खेल को बंद करने की सलाह देते हुए इसे “कड़वी सच्चाई” बताया। अपनी बात को मजबूती देने के लिए अमीषा ने अपनी फिल्मों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहो ना प्यार है, गदर और गदर 2 जैसी बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, जो आज भी उनके को-स्टार्स के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में गिनी जाती हैं। अमीषा का कहना है कि उनकी सफलता दर्शकों के प्यार और मेहनत का नतीजा है, न कि किसी कृत्रिम प्रचार का। अंत में उन्होंने कहा कि उनकी पीआर मशीनरी भले ही कमजोर हो, लेकिन वह फर्जी नहीं है क्योंकि वह दिखावे की बजाय सच के साथ खड़ी रहती हैं।
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