यूरोप को भी अधिकार वह अमेरिका के खिलाफ आवाज बुलंद करे और उन्हें ना कह दे: Barrot
पेरिस। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि जब अमेरिका ऐसे प्रस्ताव दे रहा है जो स्वीकार नहीं किए जा सकते, तो यूरोप को भी अधिकार है कि वह उनके खिलाफ आवाज बुलंद करे और उन्हें ना कह दे। बैरोट की यह टिप्पणी वाशिंगटन के कुछ सहयोगियों के बीच इस बात को लेकर बढ़ती निराशा के बीच आई है कि कैसे राष्ट्रपति डोनाल्ड डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट विदेश और व्यापार नीतियों ने पारंपरिक रिश्तों और गठबंधनों को खत्म कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के राजदूतों को दिए अपने भाषण में जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि कुछ ही महीनों में नए अमेरिकी प्रशासन ने उन रिश्तों पर फिर से सोचने का फैसला किया है जो हमें बांधते हैं। यह उनका अधिकार है और यह हमारा भी अधिकार है कि हम किसी ऐतिहासिक सहयोगी को चाहे वह कितना भी ऐतिहासिक क्यों न हो, अगर हमें उसका प्रस्ताव मंजूर न हो तो उसे न कह दें। ट्रंप का ग्रीनलैंड को लेकर रवैया यूरोपीय देशों को आगामी पॉलिसी को लेकर विचार करने को मजबूर कर रहा है। ये बड़ा द्वीप खनिज से भरपूर डेनिश इलाका है।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत है। बैरोट ने इस सम्मेलन में अमेरिका को रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बराबर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप पर बाहर से दुश्मन हमला कर रहे हैं जो पुराने रिश्तों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर हमारे बीच के मतभेद का फायदा उठाने का सपना देखते हैं, जैसा कि वे सदियों से करते आ रहे हैं। बैरोट जर्मनी के प्रेसिडेंट फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर के बयान के दो दिन बाद बोल रहे थे, जिन्होंने बहुत ही तल्ख अंदाज में कहा कि हमारे सबसे जरूरी पार्टनर, यूएसए द्वारा मूल्यों के टूटने की बात कही थी और कहा था कि दुनिया लुटेरों का अड्डा बन सकती है, जहां सबसे बेईमान लोग जो चाहें ले सकते हैं। फ्रांस में 18 महीने से भी कम समय में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में बैरोट ने उन राजनीतिक ताकतों का साथ देने की कोशिशों की आलोचना की जो यूरोपियन विरासत से मुंह मोड़ना चाहती हैं।
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