Balochistan में हो रहे हमले, दोस्त पाकिस्तान से टूट रहा है चीन का सब्र
क्वेटा। पाकिस्तान के बलूच प्रांत में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) और चीनी नागरिकों पर लगातार हमले चीन की चिंता बढ़ा रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हाल ही में ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के तहत बलूचिस्तान के 12 जिलों में एक साथ हमले किए। बीते पांच वर्षों में कम से कम 20 चीनी नागरिक इन हमलों में मारे जा चुके हैं। इन घटनाओं ने चीन को पाकिस्तान में अपने निवेश की सुरक्षा को लेकर सतर्क किया है। इन घटनाओं पर चीनी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अक्सर रिएक्टिव, अव्यवस्थित और कम संसाधनों वाली होती है, जिससे चीनी हितों को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि चीन सीधे सैन्य हस्तक्षेप या पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में दखल देने से बच रहा है, लेकिन चीन ने पाकिस्तान से सुरक्षा उपायों पर जोर बढ़ा दिया है। चीनी विशेषज्ञों ने कुछ संभावित कदम पाकिस्तानी सरकार को सुझाए है। जैसे खतरे वाले क्षेत्रों से कर्मचारियों को निकालना, ऑन-साइट सुरक्षा बढ़ाना, सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करना, एडवांस्ड एंटी-टेररिज्म उपकरण उपलब्ध कराना और पाकिस्तान की काउंटर-टेररिज्म क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देना। पाकिस्तान में चीनी परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट का निर्माण भी किया गया है, जो ग्वादर और दासू जैसे हाई-रिस्क क्षेत्रों में इंटेलिजेंस, पेट्रोलिंग, एस्कॉर्ट, रैपिड इमरजेंसी रिस्पॉन्स और जॉइंट ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित करती है।
यह कदम चीन द्वारा पाकिस्तान को दी गई चेतावनी का हिस्सा भी है कि एकतरफा हमले अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। चीनी विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान का काउंटर-टेररिज्म सिस्टम स्थिर नहीं है और लगातार हमलों के बीच उसकी क्षमता सीमित हो रही है। बीएलए के उन्नत ऑपरेशन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, नाइट-विजन गियर और विदेशी प्रशिक्षण के इस्तेमाल से यह स्पष्ट है कि हमले विशेष रूप से सीपीईसी और ग्वादर बंदरगाह को प्रभावित करने के लिए योजनाबद्ध हैं। चीन की चिंता बढ़ रही है क्योंकि हर नया हमला बीजिंग के विश्वास को कमजोर करता है और कॉरिडोर के लिए पहले से किए गए भारी निवेश पर जोखिम पैदा करता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पाकिस्तान को अपनी “राष्ट्रीय गरिमा” के बहाने सुरक्षा मुद्दों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। चीन के हितों की रक्षा के लिए वास्तविक सहयोग दिखाना होगा। यदि पाकिस्तान सहयोग नहीं करता, तब बीजिंग के विकल्प सीमित हो जाएंगे और सीपीईसी तथा अन्य परियोजनाओं की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। चीन फिलहाल सीधे हस्तक्षेप से बचते हुए सतर्कता, तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण के माध्यम से स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहा है। चीन से लगातार पाकिस्तान को दी जा रही चेतावनी चीन-ताइवान मामलों की जानकार ने लिखा है कि चीन में अब पाकिस्तान को चेतावनी दी जाने लगी है। कहा जाने लगा है कि रिश्ते भले ही कितने भी मजबूत क्यों ना हो, लेकिन एकतरफा हमले बर्दाश्त से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सामने एक विकल्प है। या वह अपनी तथाकथित राष्ट्रीय गरिमा से चिपका रहे और देश को और डूबने दे या सच्ची ईमानदारी दिखाए और सुरक्षा समस्या को हल करने के लिए चीन के साथ सहयोग करे।
Tags
Comment / Reply From
You May Also Like
Popular Posts
Newsletter
Subscribe to our mailing list to get the new updates!