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Bangladesh की सत्ताधारी पार्टी में टकराव से बढ़ी नेतृत्व की चिंता

Bangladesh की सत्ताधारी पार्टी में टकराव से बढ़ी नेतृत्व की चिंता

अभी 3 माह पहले रहमान ने संभाली थी सत्ता

ढाका। बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी में आंतरिक कलह और फूट पड़ने का एक बड़ा खतरा सामने आ रहा है। देश में नई सरकार बने अभी केवल तीन महीने का ही समय बीता है, लेकिन इतनी जल्दी ही पार्टी के भीतर नेताओं का आपसी टकराव खुलकर सामने आने लगा है। अंदरूनी सूत्रों और वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, पार्टी का मुख्य काम फिलहाल उन निष्क्रिय नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को वापस मुख्यधारा में लाना है जो लंबे समय से अलग-थलग थे। हालांकि, सत्ता में आने के ठीक बाद कई क्षेत्रों में ताकत का अनुचित प्रभाव दिखाने, महत्वपूर्ण पदों के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा करने और स्थानीय हितों पर आधारित आंतरिक टकराव बहुत तेजी से बढ़ गए हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन आंतरिक विवादों को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में संगठन के भीतर अनुशासन और एकता बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम संसदीय चुनाव आयोजित हुए थे। इन चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस चुनाव में बीएनपी और उसके सहयोगियों के गठबंधन ने कुल 212 सीटों पर कब्जा जमाया था, जिसमें से अकेले बीएनपी ही लगभग 209 सीटें हासिल करने में सफल रही थी। बांग्लादेश की 300 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने और स्पष्ट बहुमत के लिए केवल 151 सीटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में बीएनपी को दो-तिहाई से भी ज्यादा का प्रचंड बहुमत मिला था।

इस बड़ी जीत के बाद पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान ने एक उच्च स्तरीय बैठक में नेताओं को सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि जो लोग संगठन में बने रहना चाहते हैं, उन्हें जमीन पर उतरकर सक्रियता से काम करना होगा। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के महज तीन महीने बाद ही देश में होने वाले आगामी स्थानीय सरकार के चुनावों को सत्ता में वापसी के बाद बीएनपी के लिए पहली सबसे बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने आशंका जताई है कि यदि ये स्थानीय चुनाव पार्टी चिह्न के बिना होते हैं, तो कई क्षेत्रों में एक ही पद के लिए एक से अधिक बीएनपी नेता आपस में ही चुनाव लड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति बनने पर विपक्षी उम्मीदवारों के लिए जीत का मौका आसान हो सकता है। साथ ही, टिकट न मिलने और आंतरिक प्रतिद्वंद्विता के कारण पार्टी के नेताओं में स्थानीय स्तर पर खूनी संघर्ष और हिंसा भड़कने का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ सकता है। पार्टी के भीतर गहराते इस क्लेश को लेकर नेताओं का कहना है कि कई इलाकों में नवनिर्वाचित सांसदों और पार्टी के विद्रोही उम्मीदवारों के बीच के पुराने विवाद अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं।

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