इतिहास और कला को भव्यता के साथ पर्दे पर उतारने में सक्षम है Bhansali
मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार संजय लीला भंसाली ने हाल ही में अपना जन्मदिन मनाया। भंसाली भारतीय सिनेमा में उन चुनिंदा निर्देशकों में गिने जाते हैं जो इतिहास और कला को बड़े पैमाने पर पर्दे पर उतारने में सक्षम हैं। उनकी फिल्मों का हर फ्रेम सौंदर्य, गरिमा और क्लासिकता का प्रतीक माना जाता है। भंसाली की फिल्मों के भव्य सेट अक्सर बॉलीवुड की पूरी फिल्म के बजट जितने महंगे होते हैं। देवदास इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें चंद्रमुखी का कोठा और पारो का महल बनाने में लगभग 15 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ था। इतना ही नहीं, फिल्म के लिए ऐश्वर्या राय की लगभग 600 साड़ियां विशेष रूप से तैयार करवाई गई थीं। इन फिल्मों में भंसाली जिस बारीकी, कलात्मकता और ऐतिहासिक सौंदर्य को रचते हैं, वह उन्हें अन्य निर्देशकों से अलग पहचान देता है। लेकिन उनकी फिल्मों में महिला पात्रों की मज़बूत छवि के पीछे एक व्यक्तिगत कहानी छिपी है। भंसाली ने अपनी मां लीला भंसाली को बेहद संघर्षपूर्ण जीवन जीते देखा। बच्चों को पालने के लिए उनकी मां कपड़े सिलती थीं, साड़ियों में फॉल लगाती थीं और ज़रूरत पड़ने पर छोटे मंच पर नृत्य भी करती थीं। कठिन परिस्थितियों में भी उनकी मुस्कान और दृढ़ता ने भंसाली को गहराई से प्रभावित किया। यही वजह है कि निर्देशक ने ठान लिया कि उनकी फिल्मों में हर अभिनेत्री बड़े मंच पर सम्मान और शक्ति के साथ दिखाई जाएगी बिल्कुल उनकी मां की तरह दृढ़ और साहसी।
एक इंटरव्यू में भंसाली ने बताया था कि देवदास में वे ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित को मां दुर्गा के रूप में देखते थे, क्योंकि उनके लिए महिलाओं से बड़ी शक्ति कोई नहीं। यही कारण है कि उनकी अधिकांश फिल्मों में पुरुष किरदार भावनात्मक रूप से टूटे हुए दिखते हैं, जबकि महिला पात्र शक्ति और नेतृत्व का प्रतीक होते हैं चाहे बात पद्मावत की हो या रामलीला की। भंसाली राज कपूर के भी बड़े प्रशंसक हैं और उनके प्रेरणास्रोत भी। राज कपूर की फिल्मों ने भंसाली को निर्देशन की राह चुनने के लिए प्रेरित किया। कला, संस्कृति और भावनाओं के संगम से बनी भंसाली की फिल्में आज भी भारतीय सिनेमा में उत्कृष्टता की मिसाल मानी जाती हैं। मालूम हो कि भंसाली अपनी भव्य फिल्मों, शानदार सेट डिज़ाइनों और सशक्त महिला पात्रों के लिए मशहूर हैं। उनकी फिल्मों हम दिल दे चुके सनम, देवदास, बाजीराव मस्तानी और हालिया प्रोजेक्ट हीरामंडी तक, हर फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में रही है, बल्कि किरदारों के संवाद, संगीत और विशाल सेट भी लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बसे रहे हैं।
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