Gwalior में शाही अंदाज में मना Scindia राजपरिवार का दशहरा, ज्योतिरादित्य ने किया शस्त्र पूजन
- करीब 250 साल पुरानी परंपरा का आज भी निर्वहन, युवराज महाआर्यमन के साथ राजसी वेशभूषा में पहुंचे देवघर, लगा रियासतकालीन दरबार
ग्वालियर। विजयादशमी के अवसर पर ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार का पारंपरिक शाही दशहरा राजसी ठाठ-बाट और रियासतकालीन परंपराओं के साथ मनाया गया। देशभर में दशहरे का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, वहीं ग्वालियर में आयोजित शाही दशहरे ने शहर की ऐतिहासिक विरासत और राजपरिवार की परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया। करीब ढाई सौ साल पुरानी इस परंपरा का आज भी सिंधिया राजपरिवार द्वारा निर्वहन किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पुत्र महाआर्यमन सिंधिया के साथ शाही वेशभूषा में जयविलास पैलेस से महाराज बाड़ा स्थित देवघर पहुंचे। यहां सिंधिया परिवार के राजपुरोहितों की उपस्थिति में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान रियासतकालीन शस्त्रों और राजचिह्नों का पूजन भी किया गया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने करीब आधे घंटे तक पूजा-अर्चना की। इसके बाद महाआरती की गई।
पूजन के बाद रियासतकालीन परंपरा के अनुसार राजदरबार आयोजित किया गया। इसमें सिंधिया रियासत के सरदारों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और युवराज महाआर्यमन सिंधिया का शाही अंदाज में स्वागत किया। पूरे आयोजन में राजपरिवार की पारंपरिक वेशभूषा, शस्त्र पूजन और दरबार की परंपरा आकर्षण का केंद्र रही।
सत्य की जीत का पर्व है दशहरा : सिंधिया
शस्त्र पूजन के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दशहरे के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का दिवस है। उन्होंने दशहरे के पावन अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
ग्वालियर का शाही दशहरा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुल्लू और मैसूर की तरह ग्वालियर में भी दशहरे की विशिष्ट परंपरा आज तक कायम है। सिंधिया राजपरिवार द्वारा इसका निरंतर आयोजन ग्वालियर की रियासतकालीन विरासत को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का माध्यम बना हुआ है।
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