चीन से खाली हाथ अमेरिका लौटे Donald Trump
दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने संयुक्त बयान तक जारी नहीं किया -ट्रंप के ऑफर पर मौन रहे जिनपिंग, ईरान और होर्मुज पर भी नहीं हो सका फैसला
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप तीन दिवसीय चीन दौरे के बाद शुक्रवार को अमेरिका लौट गए। उन्होंने अपनी यात्रा को “ऐतिहासिक” और “बेहद सफल” बताया, लेकिन छह दौर की बैठकों के बावजूद अमेरिका और चीन के बीच किसी बड़े समझौते या संयुक्त बयान की घोषणा नहीं हो सकी। इस वजह से दौरे के वास्तविक परिणामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई शिखर वार्ता में ईरान युद्ध, ताइवान, ट्रेड-टैरिफ विवाद, रेयर अर्थ मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप टेक्नोलॉजी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों ने कई समस्याओं को सुलझाने की दिशा में प्रगति की है और द्विपक्षीय संबंध पहले से अधिक मजबूत हुए हैं, लेकिन उन्होंने किसी ठोस सहमति या समझौते का स्पष्ट विवरण नहीं दिया। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ईरान युद्ध और व्यापारिक तनाव के बीच इस यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। करीब नौ वर्षों बाद चीन पहुंचे ट्रंप के साथ 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी गए थे, जिससे बोइंग विमान सौदे, कृषि खरीद, कर्ज सहयोग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़े व्यापारिक एलानों की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि यात्रा समाप्त होने तक इन मुद्दों पर कोई औपचारिक समझौता सामने नहीं आया।
इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत गर्मजोशी देखने को मिली। चीन ने ट्रंप के स्वागत में रेड कार्पेट बिछाया, स्टेट डिनर आयोजित किया और झोंगनानहाई में विशेष मेजबानी कर संबंधों में स्थिरता का संकेत देने की कोशिश की। चीन यात्रा के बाद दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि शी जिनपिंग अमेरिका में सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश और 200 बोइंग विमान खरीदने पर सहमत हुए हैं। हालांकि चीन की ओर से इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। चीनी सरकार ने केवल व्यापक सहयोग, स्थिरता और शांति बनाए रखने की बात कही। ईरान युद्ध को लेकर भी ट्रंप ने कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की सोच समान है। उनके अनुसार दोनों देश चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहे और ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन ने ईरान को हथियार न देने और तनाव कम करने में मदद की इच्छा जताई है। इस बीच ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। विश्लेषण कंपनी केप्लर के मुताबिक 2025 में ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन ने खरीदा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ युद्धविराम पाकिस्तान के अनुरोध पर “एक एहसान” के रूप में किया गया था। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की परमाणु क्षमता प्रभावित हुई है। हालांकि दौरे के दौरान किसी औपचारिक संयुक्त बयान या ठोस समझौते की पुष्टि नहीं होने से यह संकेत मिला है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं। इस बीच दौरा पूरा कर राष्ट्रपति ट्रंप अपने देश अमेरिका लौट चुके हैं।
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