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Congo में इबोला के प्रकोप से अब तक 65 लोगों की मौत

Congo में इबोला के प्रकोप से अब तक 65 लोगों की मौत

  • दुनिया पर एक और वायरस का साया

किंशासा। दुनिया अभी अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों से उबर ही रही थी कि इस बीच इबोला वायरस ने एक बार फिर पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। अफ्रीका की शीर्ष सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था अफ्रीका सीडीसी ने कांगो के इतुरी प्रांत में इबोला फैलने की पुष्टि की है। इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आने से अब तक 65 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 246 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले मोंगवालु और रवामपारा हेल्थ जोन में दर्ज किए गए हैं, जिनमें से चार मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हो चुकी है। इबोला एक बेहद संक्रामक और जानलेवा बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी इस बात की जांच कर रहे हैं कि इस बार कौन-सा वायरस स्ट्रेन तबाही मचा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, इबोला बीमारी कई तरह के वायरस से फैलती है। कांगो में पहले इबोला जायर स्ट्रेन का प्रकोप देखा गया था, लेकिन इस बार बुंडीबुग्यो वायरस के संकेत मिले हैं। इसका असर पड़ोसी देश युगांडा में भी देखने को मिला है, जहां कांगो से आए एक नागरिक की इस वायरस के कारण मौत हो गई।

इस संकट से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ ने कांगो की मदद के लिए 5 लाख डॉलर की आपात सहायता राशि जारी की है। संगठन की एक विशेष टीम संक्रमण की जांच और सैंपल इकट्ठा करने के लिए प्रभावित इलाकों में तैनात की गई है। कांगो के लिए यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि संक्रमित क्षेत्र युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमा के बेहद करीब हैं। इसके अलावा, मोंगवालु इलाके में खनन गतिविधियों और लोगों की लगातार आवाजाही के कारण संक्रमण का दायरा बढ़ने का खतरा है। खराब सड़कें और सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं हालात को और जटिल बना रही हैं। कांगो में यह इबोला का 17वां बड़ा प्रकोप है, जहां साल 1976 में पहली बार यह बीमारी सामने आई थी। पूर्व में भी इस वायरस ने अफ्रीका में हजारों लोगों की जान ली है। अफ्रीका सीडीसी ने चेतावनी दी है कि प्रभावित क्षेत्रों से संक्रमण दूसरे देशों में फैल सकता है, जिसे देखते हुए पड़ोसी देशों के साथ एक आपात बैठक बुलाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि कांगो के पास इबोला से निपटने का पुराना अनुभव है, लेकिन मौजूदा स्ट्रेन पर वैक्सीन कितनी प्रभावी होगी, यह देखना अभी बाकी है।

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