कम बारिश से गहराने लगा संकट, Rice, दाल और तेल की कीमतों में उछाल
नई दिल्ली। मानसून की कमजोर शुरुआत ने भारतीय थाली पर महंगाई का बोझ बढ़ाना शुरू कर दिया है। खरीफ सीजन की मुख्य फसलों की बुआई में आई कमी के कारण चावल, दालों और खाद्य तेलों की खुदरा कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आने वाले समय में आम उपभोक्ता को और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आपकी थाली में दाल पतली, सब्जियों में तेल कम और चावल में कटौती दिख सकती है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इस साल सामान्य से कम बारिश (दीर्घावधि औसत का लगभग 90 प्रतिशत) का अनुमान लगाया है। जून में बारिश की कमी लगभग 40 प्रतिशत रही, जिसने धान, दालों, तिलहन और मोटे अनाजों सहित सभी प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई को बाधित किया। जुलाई के पहले सप्ताह में कुछ राज्यों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन यह कमी पूरी नहीं कर पाई। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 738 जिलों में से 44 प्रतिशत से अधिक जिलों में अब भी बारिश की कमी है, और 10 प्रतिशत जिलों में तो यह कमी बहुत गंभीर है। क्वांटईको रिसर्च की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि मानसून कमजोर रहने की स्थिति में दालें, मोटे अनाज, तिलहन और कपास सबसे अधिक जोखिम वाली फसलें होंगी। महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहाँ सिंचाई की सुविधा अपेक्षाकृत कम है, इस संकट से सबसे अधिक असुरक्षित हैं। कुल मिलाकर, कम बारिश के कारण उत्पन्न हुआ यह संकट सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम आदमी की थाली पर भी असर डाल रहा है। आने वाले समय में दाल, चावल और खाद्य तेलों की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे महंगाई का दबाव और भी बढ़ सकता है।
विशेष रूप से चावल (धान) की कीमतों में जून महीने में महंगाई दर बढ़कर 1.72 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह मात्र 0.23 प्रतिशत थी। इसका मुख्य कारण 10 जुलाई तक धान की बुआई में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8.63 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट है, जो भविष्य में आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है। दालों की स्थिति भी चिंताजनक है। खरीफ की प्रमुख दालों, जैसे तूर (अरहर), उड़द और मूंग की कीमतों में भी जून में तेज उछाल देखा गया है। तूर की महंगाई दर मई में -1.77 प्रतिशत (यानी कीमतें घट रही थीं) से बढ़कर जून में 0.85 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसी तरह, उड़द की महंगाई 0.89 प्रतिशत से बढ़कर 2.16 प्रतिशत और मूंग की 1.15 प्रतिशत से बढ़कर 1.71 प्रतिशत हो गई है। इन दालों की बुआई में क्रमशः 30.29 प्रतिशत, 29.71 प्रतिशत और 10.62 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो आने वाले महीनों में दालों की उपलब्धता और कीमतों को और प्रभावित कर सकती है। खाद्य तेलों पर भी महंगाई का साया मंडरा रहा है। तिलहन में महंगाई जून में 5.42 प्रतिशत रही, जो मई के 4.9 प्रतिशत से अधिक है। 10 जुलाई तक तिलहन की बुआई में 21.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर सरसों, सोया और सूरजमुखी जैसे खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ेगा। ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों, जिन्हें अक्सर कमजोर इलाकों में वैकल्पिक फसल के रूप में बढ़ावा दिया जाता है, उनकी महंगाई भी बढ़ रही है।
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