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  • Monday, 07 September 2026
फिर सक्रिय हुए Champat Rai, बोले- कोई दिक्कत हो तो हमें बताएं, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद कर्मचारियों से की मुलाकात

फिर सक्रिय हुए Champat Rai, बोले- कोई दिक्कत हो तो हमें बताएं, राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद कर्मचारियों से की मुलाकात

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद चौतरफा आलोचनाओं का सामना करने वाले और महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय एक बार फिर सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। चोरी मामले के बाद पहली बार उन्होंने तीर्थ यात्री सेवा केंद्र का दौरा किया और कर्मचारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना, यहां तक कहा कि कोई परेशानी हो तो उन्हें बताएं। इस दौरान उनके साथ पूर्व ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा भी मौजूद रहे। एक घंटे तक सेवा केंद्र में रहकर उन्होंने कर्मचारियों का हालचाल जाना। चंपत राय की सक्रियता ऐसे समय में देखने को मिली है जब श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को नया पूर्णकालिक महासचिव और पहला सीईओ मिल गया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई जब जून में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में दान चोरी का मुद्दा उठाया था। शुरुआत में चंपत राय ने इन आरोपों को गलत बताया था, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और एसआईटी जांच में चोरी की पुष्टि होने के बाद यह साफ हो गया कि उन्हें अखिलेश के आरोपों से पहले ही चोरी का पता था। लाखों रुपयों की बरामदगी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ और निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने तो इस पूरी घटना को डाका तक करार दिया था।

इन गंभीर आरोपों के चलते चंपत राय चौतरफा घिर गए थे और उन्होंने अंततः महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी बीच, अलग-अलग शिकायतों और आरोपों के चलते राम मंदिर की व्यवस्थाओं से हटाए गए तीन कर्मचारियों, शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता, केडी तिवारी और बजरंग पाठक की भी वापसी हो गई है। संदीप गुप्ता को एक विदेशी महिला की शिकायत के बाद तीर्थ यात्री सेवा केंद्र की लॉकर व्यवस्था से हटा दिया गया था। विदेशी महिला ने लॉकर में सामान रखने को लेकर हुई कहासुनी के बाद ट्रस्ट को शिकायत पत्र सौंपा था। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संदीप को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें काम से हटा दिया गया था। शहीद कारसेवक के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संदीप को मंदिर में काम दिया गया था। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आगमन के बाद उनकी बहाली की सिफारिश की गई और उन्हें दोबारा यथास्थान तैनात कर दिया गया।

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