Hormuz में 7 तेल टैंकरों पर हमला, ट्रंप ने दिए सैन्य कार्रवाई के संकेत - ईरान-अमेरिका में बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य संघर्ष की स्थिति गहराती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तल्ख तेवर दिखाते हुए ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को बुरी तरह से सबक सिखाया है। इस बीच, ईरान का कहना है कि एक ही दिन में रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सात तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव की शुरुआत के बाद से एक दिन में यह नुकसान की सबसे बड़ी घटना है, जिसने क्षेत्र में युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, में हुए इन सात जहाजों पर हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक ही रात में सात जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से तीन बारूदी सुरंगों की चपेट में आए और चार पर सीधे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने हमला किया। ईरान का स्पष्ट मानना है कि ये हमलाग्रस्त जहाज अमेरिका से जुड़े हैं और इन्हें ट्रंप प्रशासन का सीधा समर्थन प्राप्त है।
आईआरजीसी ने हाल ही में घोषणा की थी कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी आक्रामकता से निपटने के लिए उनके पास अब एक नई और आक्रामक रणनीति है। इस नई रणनीति के तहत, ईरान पर किसी भी तरह की समुद्री नाकेबंदी लागू करने को सीधे तौर पर युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। अब स्थिति ऐसी नहीं है कि ईरान केवल अमेरिका या इजरायल की ओर से संभावित हवाई हमले का इंतजार करे। आईआरजीसी ने यह साफ कर दिया है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भी जवाबी कार्रवाई करने को तैयार हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इन जहाजों की आवाजाही को अमेरिका का प्रोत्साहन, मदद और समर्थन प्राप्त है। ईरान ने चेतावनी जारी की है कि होर्मुज में अभी और भी ऐसे हमले हो सकते हैं। उसने कहा है कि आने वाले दिनों में जब अन्य जहाज इस संवेदनशील जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेंगे, तो ईरान अपनी इन धमकियों को सच कर दिखाने से नहीं चूकेगा। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल भी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष के फिर से शुरू होने की बात कर रहे हैं। ईरान भी इस संभावित टकराव के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहा है और उसका दावा है कि उसके पास किसी भी जवाबी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पर्याप्त क्षमता और साधन मौजूद हैं। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में एक बड़े और खतरनाक सैन्य टकराव की संभावना को और भी अधिक मजबूत करता है।
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