America बोला ईरान पर एयर स्ट्राइक करेंगे, खामेनेई ने कहा हम व्हाइट हाउस को नहीं छोड़ेगे
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है। दोनों देशों के बीच जंग के हालात बने हुए है। अमेरिका ने ईरान को चेताते हुए कहा है कि वो कभी भी एयरस्ट्राइक कर सकता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसक कार्रवाई की खबरों से चिंतित है और ईरान के खिलाफ एयरस्ट्राइक सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। लेविट ने वेस्ट विंग के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं और हवाई हमले भी उन्हीं विकल्पों में शामिल हैं। वहीं ईरान ने भी सख्त लहजे में कहा है कि ईरान की अस्मिता पर खतरा हुआ तो हम व्हाइट को किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेंगे। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अपनी कपटी कार्रवाइयों से बाज आए और ईरान के आंतरिक मामलों में गद्दार भाड़े के टट्टुओं के जरिए हस्तक्षेप करना बंद करे। खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक संदेश में दावा किया कि ईरानी जनता ने दुश्मनों के सामने अपनी पहचान और संकल्प को मजबूती से पेश किया है। उन्होंने देश भर में निकाली गई सरकार समर्थक रैलियों का उदाहरण देते हुए इसे अमेरिकी नेतृत्व के लिए एक गंभीर चेतावनी करार दिया। दूसरी ओर, वाशिंगटन से आ रही खबरों ने तनाव को और अधिक हवा दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रही हिंसक कार्रवाई की खबरों से बेहद चिंतित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) सहित कई सैन्य विकल्प मेज पर मौजूद हैं। लेविट ने वेस्ट विंग के बाहर पत्रकारों से कहा कि यद्यपि अमेरिका की प्राथमिकता कूटनीति है, लेकिन राष्ट्रपति जरूरत पड़ने पर सैन्य ताकत के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरानी नेतृत्व की सार्वजनिक बयानबाजी और उनके द्वारा निजी स्तर पर भेजे जा रहे संदेशों में जमीन-आसमान का अंतर है।गौरतलब है कि यह टकराव ईरान के आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर जनआंदोलन का परिणाम है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 648 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल हैं। करीब 10 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जो विरोध प्रदर्शन शुरुआत में महंगाई और आर्थिक बदहाली को लेकर शुरू हुए थे, वे अब सीधे तौर पर धार्मिक सत्ता को उखाड़ फेंकने की मांग में बदल गए हैं। सरकार ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार देते हुए कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगा दी है। तनावपूर्ण स्थिति के बीच तेहरान के इंकलाब स्क्वायर में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि ईरान इस समय अमेरिका और इजरायल के सैन्य दबाव के कारण चार मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान की संप्रभुता पर हमला हुआ, तो उनके सशस्त्र बल कड़ा और विनाशकारी जवाब देंगे। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें दोनों देशों के अगले कदमों पर टिकी हैं। जहाँ यूरोपीय संघ अतिरिक्त प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है, वहीं रूस ने ईरान के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की निंदा की है। इस रणनीतिक खींचतान ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है।
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