America को न्यूक्लियर वॉर का डर, बाइडन ने दिया मिसाइल रेडी रखने का आदेश
न्यूयॉर्क। रूस,चीन और नार्थ कोरिया से अमेरिका डरा हुआ है। उसे लग रहा है कि ये तीन देशों की तिगड़ी कहीं अमेरिका पर बमों की बरिश न कर दे। यही वजह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने परमाणु मिसाइल रेडी रखने का आदेश दिया है। इस बाबत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मार्च महीने में ही एक बेहद गोपनीय परमाणु रणनीति योजना को मंजूरी दी थी। इसे न्यूक्लियर एम्प्लॉयमेंट गाइडेंस के नाम से जाना जाता है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। हालांकि, इस रिपोर्ट पर चीन ने अमेरिका को कोसा है। चीन का कहना है कि अमेरिका बार-बार चीन से परमाणु खतरे का राग अलाप रहा है, मगर हकीकत तो यह है कि दुनिया के लिए सबसे बड़ा परमाणु खतरा तो वह खुद है। अमेरिकी की परमाणु रणनीति योजना के तहत पहली बार अमेरिका ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। माना जा रहा है कि चीन के बढ़ते परमाणु हथियारों के जखीरों से पैदा होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए अमेरिका ने यह फैसला लिया है।
अमेरिका का मानना है कि अगले एक दशक में चीन का परमाणु जखीरा अमेरिका को टक्कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने साफ-साफ कहा है कि अमेरिका को केवल चीन, रूस और नॉर्थ कोरिया से ही न्यूक्लियर जंग का खतरा है। उसमें भी अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता चीन है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब अमेरिका और चीन में तू-तू, मैं-मैं होने लगी है। चीन को परमाणु खतरा बताए जाने पर बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका खुद दुनियाभर में परमाणु खतरे का प्राइमरी सोर्स है। चीनी सरकार के मुखपत्र ने लिखा, ‘अमेरिका भले ही चीन के परमाणु खतरे का रोना रो रहा है, मगर हकीकत तो यह है कि वह खुद अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है। अमेरिका अपने परमाणु जखीरे को बनाए रखने के लिए बार-बार बहाने के रूप में चीन का नाम लेता रहता है। अमेरिका चाहता है कि वह दुनियाभर में सबसे ताकतवर रहे, ताकि वह बिना किसी डर और अपनी मर्जी से दुनिया भर के देशों को धमका सके और उस पर प्रेशर बनाकर रखे। अमेरिका यह सब अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कर रहा है।
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