राष्ट्र निर्माण के लिए बनना होगा नींव का पत्थर : Prof Sahastrabuddhe
ग्वालियर/किसी भी समाज अथवा राष्ट्र के निर्माण में नई पीढ़ी की भूमिका अहम होती है। हमें तय करना है कि राष्ट्र अथवा समाज के निर्माण में किस भूमिका में आना है। नींव का पत्थर ही वो आधार है जिस पर राष्ट्र निर्माण मजबूती से हो सकता है इसलिए आप नींव का पत्थर बनने की कोशिश कीजिए। यह बात राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने कही। वह विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई और सेवार्थ जन कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में चल रही कला रुचि निर्माण कार्यशाला के समापन अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोल रही थी।
छः दिवसीय इस कार्यशाला का समापन सोमवार को विश्वविद्यालय के तानसेन सभागार में हुआ। इस दौरान बाल एवं किशोर कलाकारों ने इस प्रशिक्षण में सीखी हुई विधाओं का प्रदर्शन मंच से किया। अंत में सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मध्य भारत शिक्षा समिति के सचिव प्रो. राजेंद्र वैद्य, विशिष्ट स्थिति विश्वविद्यालय के कार्य परिषद सदस्य चंद्र प्रताप सिकरवार, सेवार्थ जन कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ ओपी दीक्षित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से संयोजक डॉ पारुल दीक्षित, सहसंयोजक डॉ विकास विपट, पीआरओ कुलदीप पाठक भी मौजूद रहे।
गायन में राग भैरव
इस दौरान बाल एवं किशोर कलाकारों ने इस छः दिवसीय कार्यशाला में सीखी हुई विधाओं का प्रदर्शन मंच से किया। शुरुआत गायन से हुई। इसमें पहले कौन कहता है भगवान आते नहीं...। फिर हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं...। अंत में राग भैरव, छोटा ख्याल में जागो मोहन प्यारे...की सुंदर प्रस्तुति ने देखने और सुनने वालों का मन मोह लिया।
नाटिका से समाज को संदेश
समाज को संदेश देने के लिए 4 लघु नाटिकाएं भी प्रस्तुत की गई।
इनमें बच्चों में मोबाइल की बढ़ती हुई लत और फास्ट फूड के दुष्परिणाम, चोरी
न करने का संदेश लघु नाटिकाओं के माध्यम से दिया गया।
अंत में सामूहिक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति हुई, जिसमें गणेश स्तुति में नृत्य प्रस्तुत हुआ।
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