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  • Friday, 25 September 2026
AI पर ट्रंप-जिनपिंग की बातचीत कहा- मानव नियंत्रण जरुरी

AI पर ट्रंप-जिनपिंग की बातचीत कहा- मानव नियंत्रण जरुरी

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार, आपसी सहयोग और दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। अमेरिका दौरे पर पहुंचे शी जिनपिंग का वाइट हाउस में औपचारिक स्वागत किया गया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका-चीन संबंधों को टकराव से बचाने और सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। शी जिनपिंग ने एआई को लेकर कहा कि दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि इस तकनीक का विकास मानव नियंत्रण में रहे और इसका इस्तेमाल लोगों के कल्याण के लिए हो। उन्होंने एआई के विकास और प्रबंधन में दोनों देशों की भूमिका का उल्लेख करते हुए तकनीक को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।


चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म करने की बात नहीं कही, बल्कि इसे स्वस्थ और सीमित दायरे में रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसी प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए जिसमें दोनों आगे बढ़ने की कोशिश करें, न कि ऐसा टकराव जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार हो। शी ने अमेरिका और चीन को टकराव से बचने की जरूरत बताते हुए दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित संवाद जारी रखने की बात कही। उन्होंने संकट की स्थिति में बातचीत के माध्यम से तनाव कम करने के उपाय विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने थ्यूसिडाइड्स ट्रैप का उल्लेख किया, जो उभरती और स्थापित शक्तियों के बीच संघर्ष की आशंका से जुड़ी अवधारणा है।

ट्रंप ने भी दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन अपने बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपने लंबे राजनीतिक संपर्क का उल्लेख करते हुए दोनों नेताओं के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों की बात कही। बातचीत में एआई और तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर खास ध्यान रहा, लेकिन भारत का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया। अमेरिका और चीन के बीच एआई, सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीक को लेकर होने वाली नीतियों का असर भारत समेत दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। भारत घरेलू सेमीकंडक्टर उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अमेरिका-चीन के तकनीकी संबंधों में बदलाव से वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

 

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