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समय से पूर्व Europe में पड रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, कई इलाकों में हाई अलर्ट

समय से पूर्व Europe में पड रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, कई इलाकों में हाई अलर्ट

पेरिस। गर्मियों के मौसम की शुरुआत से पहले ही पश्चिमी यूरोप इस साल दूसरी बार एक भयानक हीटवेव की चपेट में आ गया है, जिससे इंग्लैंड से लेकर फ्रांस और जर्मनी तक के लोग एक साथ तपती गर्मी का सामना कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस हफ्ते गर्मी से कोई राहत नहीं मिलने वाली है, और जून के महीने में इस तरह का तापमान देखकर हर कोई हैरान है। मौसम विभाग ने कई इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है, और फ्रांस में हालात सबसे ज्यादा खराब नजर आ रहे हैं, जहाँ तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। जर्मनी और इंग्लैंड में भी रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी पड़ रही है। इस खतरनाक मौसम के पीछे एक खास तरह का वैज्ञानिक कारण, जिसे हीट डोम कहा जाता है, काम कर रहा है। फ्रांस की मौसम एजेंसी ने अपने 60 विभागों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जो उनका दूसरा सबसे बड़ा अलर्ट है। 21 जून से कुछ इलाकों में इसे रेड अलर्ट में भी बदला जा सकता है। फ्रांस में हीटवेव को कैनिकल कहा जाता है, जिसका मतलब खतरनाक गर्म दिनों और रातों का दौर होता है। एजेंसी का अनुमान है कि 22 जून का दिन सबसे खराब हो सकता है, जब तापमान 37 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। 


यह फ्रांस के इतिहास में जून का सबसे गर्म दिन बन सकता है। इंग्लैंड में भी गर्मी से हालात काफी खराब हो गए हैं, जहाँ के मेट ऑफिस ने दक्षिणी इंग्लैंड के लिए अंबर एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग जारी की है। यह चेतावनी 22 और 23 जून के लिए है, और वहाँ तापमान 34 डिग्री तक पहुँच सकता है, जो साल 1976 में बने 35.6 डिग्री के रिकॉर्ड के बहुत करीब है। जर्मनी में राष्ट्रीय मौसम सेवा ने लगभग पूरे देश के लिए चेतावनी दी है, जिसमें दक्षिण-पश्चिम इलाके में तापमान 38 डिग्री तक पहुँचने की आशंका है। मौसम विभाग ने बताया है कि इस भयंकर गर्मी के बाद भारी बारिश और ओले भी गिर सकते हैं, और इसके साथ ही खतरनाक तूफान आने की भी आशंका जताई गई है। इस पूरी समस्या के पीछे हीट डोम का हाथ है, जिसे आप एक उबलते बर्तन पर रखे ढक्कन की तरह समझ सकते हैं। इसमें हाई प्रेशर का एक बहुत बड़ा एरिया महाद्वीप के ऊपर ठहर जाता है और हिलने का नाम नहीं लेता। 


इसके अंदर हवा धीरे-धीरे नीचे की तरफ बैठती है। नीचे आते समय हवा सिकुड़ती है और गर्म हो जाती है, यह बिलकुल साइकिल पंप की तरह काम करता है जो दबाने पर गर्म हो जाता है। नीचे की तरफ आती हवा बादलों को भी पूरी तरह बिखेर देती है, जिससे सूरज की तेज किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं। ढक्कन की तरह काम करने वाले इस प्रेशर के कारण गर्मी एक ही जगह जमा होने लगती है। सहारा रेगिस्तान से उत्तर की तरफ आने वाली गर्म हवा हालात को और ज्यादा बिगाड़ देती है। परेशानी सिर्फ दोपहर तक ही सीमित नहीं है, विशेषज्ञ ट्रॉपिकल रातों की चेतावनी भी दे रहे हैं, इन रातों में तापमान कभी 20 डिग्री से नीचे नहीं जाता। इंसान के शरीर को दिन की गर्मी से उबरने के लिए ठंडी रातों की जरूरत होती है, और जब यह राहत नहीं मिलती है तो शरीर पर काफी दबाव पड़ता है। ऐसे में बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ उठानी पड़ती है।


 यूरोप के आसपास के समुद्र भी काफी गर्म हो चुके हैं, जिससे तटीय इलाकों में रातें बहुत उमस भरी हो गई हैं। यह सब मौसम में अचानक होने वाला कोई बदलाव नहीं है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, यूरोप धरती का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है। यह वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी स्पीड से गर्म हो रहा है। गर्म होती दुनिया खुद से हीटवेव नहीं बनाती है, लेकिन यह मौसम को ज्यादा गर्म और लंबा जरूर बना देती है। इसी वजह से गर्मी समय से पहले ही आ गई है। हाल की यह दूसरी बड़ी यूरोपियन हीटवेव है जबकि अभी वसंत का ही मौसम चल रहा है। 

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